खेड़ा ईदगाह विवाद से गरमाई सियासत, आमने-सामने हुआ सत्तापक्ष और विपक्ष

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उधम सिंह नगर के रुद्रपुर स्थित खेड़ा ईदगाह विवाद से उत्तराखंड मे सियासत तेज हो चुकी है, पहले यह मामला मात्र अवैध अतिक्रमण के रुप में देखा जा रहा था लेकिन अब खेड़ा ईदगाह विवाद ने अब कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीधी राजनीतिक भिड़ंत का रूप ले लिया है। दरअसल, बीते रोज पहले विकास प्राधिकरण और नगर निगम ने सयुंक्त कार्रवाई के दौरान खेड़ा इलाके में 8 एकड़ में बनी ईदगाह को अतिक्रमण करार करते हुए ध्वस्त किया था। अब भले ही प्रशासन की यह कार्रवाई कागजी रुप से नियमों के आधार पर थी लेकिन इस घटना से मुस्लिम समुदाय खासा आहत हुआ और उनमें असंतोष पैदा हो गया। प्रशासन की इस कार्रवाई पर स्थानिय लोगों का कहना था कि प्रशासन ने यह कार्रवाई बिना किसी संवाद और जानकारी के की है। स्थानीय लोगों का प्रशासन पर आरोप है कि न तो प्रशासन और न ही किसी राजनीतिक दल के नेता ने उनसे इस बारे में जानकारी देना या बात करना उचित समझा कि आखिर यह कार्रवाई क्यों हुई, किस आधार पर हुई और भविष्य में उनकी धार्मिक गतिविधियों का क्या होगा ? गौरतलब है कि प्रशासन की इस चुप्पी से मुस्लिम समुदाय में असुरक्षा और असंतोष की भावना को जन्म दे दिया है।

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आमने-सामने हुआ सत्तापक्ष और विपक्ष


खेड़ा ईदगाह पर प्रशासनिक कार्रवाई ने सियासी अंगारों को हवा देने का काम कर दिया है, क्योंकि बीते 14 दिसंबर को हुई “वोट चोर गद्दी छोड़ ” रैली में भी रुद्रपुर समेत कई स्थानों के कांग्रेस नेताओं ने इस मुद्दे पर सरकार के समक्ष अपनी नाराजगी व्यक्त की थी, जिसमें मुस्लिम कांग्रेस नेताओं ने मंच से दूरी बनाते हुए खुले तौर पर अपना विरोध दर्ज कराया। वहीं खेड़ा विवाद पर किच्छा विधायक और वरिष्ठ कांग्रेस नेता तिलक राज बेहड़ खेड़ा ईदगाह पहुंचे, जहां उन्होंने स्थानिय लोगों के साथ बैठक कर न सिर्फ उनका पक्ष सुना बल्कि कार्रवाई की पूरी स्थिति भी समझी और उन्हें आश्वाशन भी दिया कि वे इस मामले को सरकार और प्रशासन के समक्ष मजबूती से उठाएंगे।

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बहरहाल, अतिक्रण हटाने की कार्रवाई भले ही सरकारी दस्तावेजों के अनुरुप उचित रही हो लेकिन कहीं न कहीं स्थानियों की आहत भावना को विपक्ष का समर्थन मिल जाने के बाद अब इस मामले ने राजनीतिक रुप ले लिया है। खेड़ा ईदगाह विवाद ने अब सत्तापक्ष और विपक्ष को आमने-सामने ला कर खड़ा कर दिया है। अब देखना यह होगा कि यह सियासी जंग आखिर कब तक जारी रहती है।