देहरादून में वकीलों और जिला अधिकारी (डीएम) के बीच विवाद गहराता जा रहा है। बार एसोसिएशन के बैनर तले वकीलों ने अपने आंदोलन को तेज करते हुए अब प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर डीएम के तत्काल तबादले की मांग की है। वकीलों का आरोप है कि डीएम अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर रहे हैं। इस विवाद के चलते रजिस्ट्री कार्यालयों और राजस्व न्यायालयों में काम पूरी तरह ठप रहा, जिससे आम जनता को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
विवाद की मुख्य वजह
विवाद की जड़ डीएम द्वारा राज्य विधि परिषद को भेजा गया एक ‘गोपनीय पत्र’ है। इस पत्र में डीएम ने बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष प्रेमचंद शर्मा पर अदालती कार्यवाही के दौरान अनुशासनहीन आचरण करने का आरोप लगाया था। वकीलों का मानना है कि यह कदम मनमाना है और प्रशासनिक शक्तियों का गलत इस्तेमाल है।
कामकाज पर असर और हड़ताल
बार एसोसिएशन देहरादून के अध्यक्ष अनिल कुकरेती और सचिव अजय बिष्ट के नेतृत्व में वकीलों ने सोमवार को काम का बहिष्कार किया। इसके परिणामस्वरूप जिले में रजिस्ट्रियां नहीं हो सकीं और राजस्व अदालतों में भी कोई सुनवाई नहीं हुई। वकीलों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे।
प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की अपील
वकीलों ने सीधे प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। उनका आरोप है कि स्थानीय प्रशासन वकीलों के मान-सम्मान को ठेस पहुँचा रहा है। बार एसोसिएशन का कहना है कि डीएम का व्यवहार लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है, इसलिए उनका देहरादून से स्थानांतरण होना बेहद जरूरी है।
बहरहाल, वकीलों के ओर से जिलाधिकारी सविन बंसल के तबादले को लेकर भले ही आंदोलन किया जा रहा हो, लेकिन राजधानी देहरादून की आम जनता इस फैसले के सख्त खिलाफ नजर आ रही है और बकायदा, जिलाधिकारी बंसल के पक्ष में आम जनता द्वारा सोशल मीडिया पर कैंपेन चलाया जा रहा है। यानी देहरादून में जनता बनाम वकील की लड़ाई अब आमने-सामने की हो चुकी है।

