भारत में ऐतिहासिक ‘डिजिटल जनगणना 2027’ के पहले चरण का आगाज़ हो गया है। बुधवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने अपनी ‘स्व-गणना’ (Self-Enumeration) की प्रक्रिया पूरी कर इस अभियान की शुरुआत की। यह भारत की पहली पूरी तरह से डिजिटल जनगणना है, जहाँ नागरिक एक विशेष वेब पोर्टल के माध्यम से अपने और अपने परिवार का विवरण खुद दर्ज कर सकते हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने जोर देकर कहा कि यह प्रक्रिया देश की विकास यात्रा को गति देने और सरकारी योजनाओं का लाभ हर नागरिक तक पहुँचाने में बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी।
डिजिटल पोर्टल और 14 भाषाओं की सुविधा
जनगणना के लिए एक विशेष पोर्टल तैयार किया गया है जो अंग्रेजी, हिंदी और 14 अन्य क्षेत्रीय भाषाओं को सपोर्ट करता है। नागरिक अपनी सुविधा के अनुसार भाषा चुनकर अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं। इसके लिए 15 दिनों की स्व-गणना अवधि निर्धारित की गई है, जिसमें लोग वेब पोर्टल पर खुद डेटा भरने का विकल्प चुन सकते हैं।
आवास गणना और पहले चरण का लक्ष्य
जनगणना का यह पहला चरण मुख्य रूप से ‘आवास गणना’ (Housing Census) और मकानों की सूची बनाने से जुड़ा है। डेटा संग्रह के लिए डिजिटल माध्यमों का उपयोग पहली बार किया जा रहा है, जिससे प्रक्रिया अधिक सटीक और पारदर्शी होगी। यह प्रणाली प्रत्येक देशवासी को अपने घर-परिवार का विवरण आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज करने का अधिकार देती है।
लापरवाही पर सख्त सजा और जुर्माने का प्रावधान
जनगणना को लेकर नियमों को काफी कड़ा बनाया गया है। यदि कोई अधिकारी काम में लापरवाही बरतता है या गलत डेटा फीड करता है, तो उसे 3 साल की जेल हो सकती है। वहीं, आम जनता के लिए भी सही जानकारी देना अनिवार्य है; गलत जानकारी देने या जनगणना दल को सहयोग न करने पर 1,000 रुपये तक के जुर्माने और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।

