अंकिता हत्या कांड में फिर कांग्रेस के निशाने पर वीआईपी, पहले अजय कुमार अब दुष्यंत कुमार पर उठे सवाल, सरकार से जांच की मांग…. आखिर कौन है असल में vip ?

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देहरादून।
अंकित भंडारी हत्याकांड एक बार फिर प्रदेश की राजनीति और सामाजिक विमर्श के केंद्र में आ गया है। इस बहुचर्चित मामले में कथित वीआईपी के नाम को लेकर उठ रहे सवालों और अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होने के आरोपों ने सियासी पारा दोबारा चढ़ा दिया है। साल 2024 में अंकित की मां सोनी देवी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने जांच प्रक्रिया और सिस्टम की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। अब कांग्रेस महिला प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला के ताज़ा बयान ने इस मामले को फिर से सुर्खियों में ला दिया है।
वीडियो में अंकित की मां सोनी देवी ने कहा था कि उन्होंने यह भी सुना है कि इस हत्याकांड में जिस वीआईपी की चर्चा हो रही थी, उसका नाम अजय कुमार बताया जा रहा है, लेकिन लंबे समय तक उसके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। सोनी देवी का कहना था कि उन्हें बार-बार यह महसूस कराया गया कि “सिस्टम वीआईपी के आगे बेबस है”
अब इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने भाजपा पर सीधा राजनीतिक हमला बोला है। महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला ने बयान जारी करते हुए कहा कि अंकित भंडारी हत्याकांड में वीआईपी का नाम बार-बार सामने आने के बावजूद सरकार और प्रशासन का मौन बेहद चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार प्रभावशाली लोगों को बचाने में जुटी हुई है, जिस कारण सच्चाई सामने नहीं आ पा रही है और पीड़ित परिवार को न्याय से दूर रखा जा रहा है।
ज्योति रौतेला ने भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौड़ की पत्नी उर्मिला राठौर द्वारा दिए गए बयान का कहवाला देते हुए कहा कि अंकिता हत्याकांड में जिस वीआईपी का नाम लिया जा रहा है, वह भाजपा के बड़े नेता दुष्यंत कुमार हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर वह वीआईपी कौन है और उसे किसके संरक्षण में बचाया जा रहा है। उनका कहना था कि यदि सरकार वास्तव में निष्पक्ष है, तो उसे बिना किसी राजनीतिक दबाव के उस वीआईपी के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए, जिसका नाम इस मामले में बार-बार सामने आ रहा है। उन्होंने दो टूक कहा कि “सिस्टम वीआईपी के नाम पर मौन साधे बैठा है और यही मौन जनता के भरोसे को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रहा है।”
महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ही इस मामले में स्पष्टता नहीं दिखाई और वीआईपी के नाम पर स्थिति साफ नहीं की, तो कांग्रेस सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन करेगी। उनके अनुसार यह सिर्फ एक परिवार के न्याय का मामला नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश में कानून-व्यवस्था और न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता से जुड़ा सवाल है।
वहीं, भाजपा की ओर से इस मुद्दे पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, सरकार पहले कई बार यह दावा कर चुकी है कि जांच एजेंसियां स्वतंत्र रूप से काम कर रही हैं और दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। बावजूद इसके, वीआईपी के नाम को लेकर जारी राजनीतिक बयानबाज़ी ने एक बार फिर यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या अंकित भंडारी को पूरा न्याय मिल पाएगा या यह मामला भी राजनीति और रसूख के दबाव में उलझकर रह जाएगा।