आत्मनिर्भर पंचायतों के लिए राज्यसभा में गूँजी आवाज: राजस्व बढ़ाने पर केंद्र सरकार का बड़ा फोकस

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राज्यसभा सांसद नरेश बंसल ने सदन में पंचायतों की वित्तीय स्वायत्तता और उनके स्वयं के राजस्व स्रोत बढ़ाने का महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया है। इसके जवाब में पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह ने स्पष्ट किया कि सरकार ग्रामीण निकायों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए ठोस कदम उठा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, 2017 से 2022 के बीच देश की पंचायतों ने कुल 25,595 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया है। सरकार का लक्ष्य है कि पंचायतें केवल सरकारी अनुदान पर निर्भर न रहें, बल्कि टैक्स और अन्य माध्यमों से स्वयं का कोष विकसित करें, ताकि ग्रामीण विकास की गति को तेज किया जा सके।

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राजस्व संग्रहण और गोवा का मॉडल

मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि देश में पंचायतों का प्रति व्यक्ति औसत राजस्व संग्रहण वर्तमान में 59 रुपये है। इस सूची में गोवा सबसे आगे है, जहाँ प्रति व्यक्ति राजस्व 1635 रुपये है। सरकार चाहती है कि अन्य राज्यों की पंचायतें भी इसी तरह अपनी आय के स्रोत विकसित करें। इसके लिए हिमाचल प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सफल पायलट प्रोजेक्ट भी चलाए जा चुके हैं।

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समर्थ पंचायत पोर्टल और पारदर्शिता

टैक्स कलेक्शन और राजस्व प्रबंधन में पारदर्शिता लाने के लिए केंद्र सरकार ने ‘समर्थ पंचायत पोर्टल’ विकसित किया है। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म की मदद से पंचायतों के आय-व्यय का हिसाब रखना आसान होगा और भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम होगी। डिजिटल सशक्तिकरण से पंचायतों के कामकाज में जवाबदेही बढ़ेगी।

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आत्मनिर्भर पंचायत पुरस्कार और वित्तीय प्रोत्साहन

पंचायतों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा पैदा करने के लिए सरकार ने ‘आत्मनिर्भर पंचायत विशेष पुरस्कार’ की शुरुआत की है। इस योजना के तहत प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली पंचायत को 1 करोड़ रुपये की भारी-भरकम प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, 16वें वित्त आयोग ने राजस्व वृद्धि से जुड़े प्रदर्शन के आधार पर पंचायतों को 43,524 करोड़ रुपये का अनुदान देने की सिफारिश भी की है।

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