राजधानी देहरादून के नेहरू कॉलोनी थाना क्षेत्र स्थित जगत जीवन ज्योति गुरुकुल के संचालक और शिक्षक जनार्धन बिंजोला पर एक 12–13 वर्षीय किशोरी के साथ बार‑बार दुष्कर्म करने का खुलासा हुआ है। डेढ़ वर्ष तक पीड़िता ने अपने आप को इस दर्द के साथ अकेले झेला और घटना को दबाए रखा, लेकिन जब उसी संस्थान में एक अन्य छात्रा के खिलाफ आरोप लगने पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की तो चुप्पी तले दबे अन्य राज भी सामने आ गए। पीड़िता की मां ने बताया कि उनकी बेटी गुरुकुल के ही हॉस्टल में रहती थी, जहां बिंजोला ने कई बार उसके साथ दुष्कर्म किया।
जब मां ने सीधा सवाल किया – “क्या तुम्हारे साथ भी ऐसा हुआ है?” – तो बेटी सिसकियों के साथ सारी बात सुनाने लगी और डेढ़ साल पुराना दर्द उजागर हुआ। अपर जिला एवं सेशन जज रजनी शुक्ला की अदालत ने जनार्धन बिंजोला को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई और 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। यह मामला 2019 से 2021 के बीच घटित बताया गया है और पहले ही एक अन्य किशोर के मामले में बिंजोला को कोर्ट ने दोषी माना चुका है, जिस पर उसे 28 फरवरी को भी सजा सुनाई गई थी। अब इस फैसले से संस्थान में छात्राओं की सुरक्षा और शिक्षक वर्ग पर नज़र रखने की बात तेज हो गई है।
‘पापा जी’ की हैवानियत, डेढ़ साल तक दबाए रखा राज
किशोरी ने बताया कि एक दिन जनार्धन ने सिर में दर्द की बात कहते ही उसे अपने कमरे में सोने के लिए बुला लिया, रात में उसने निजी अंगों के साथ छेड़छाड़ करते हुए दुष्कर्म किया। जब उसने इसकी शिकायत संस्थान की कर्मचारी ओपर्णा उर्फ दोपी से की तो उसे चुप रहने के लिए कहा गया। इसके बाद डेढ़ साल तक कई बार यही हैवानियत दोहराई गई, जब भी वह मां से फोन पर बात करती तो स्पीकर पर फोन रखा जाता और उसे मां के पास नहीं जाने दिया जाता था, जान से मारने की धमकी भी दी जाती थी।
जब इसी संस्थान में एक और किशोरी ने इसी तरह का दुष्कर्म का मामला उजागर किया और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई तो पीड़िता की मां ने बेटी से सीधे सवाल किया, जिस पर बेटी ने सिसकते‑सिसकते डेढ़ साल पुरानी हैवानियत की पूरी कहानी सुना दी। अपर जिला एवं सेशन जज रजनी शुक्ला की अदालत ने जनार्धन बिंजोला को दोषी मानते हुए 20 वर्ष के सश्रम कारावास और 50 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया, जबकि ओपर्णा को जुर्माने के बाद रिहा करने का आदेश दिया। इससे पहले 28 फरवरी को भी जनार्धन बिंजोला एक अन्य किशोरी के साथ दुष्कर्म के मामले में 20 वर्ष की सजा झेल चुके हैं, जिससे उत्तराखंड में बाल सुरक्षा और गैर‑सरकारी संस्थानों पर नज़र रखने की मांग तेज हो गई है।

