उत्तराखंड में इन दिनों अंकिता भंडारी हत्याकांड लगातार सुर्खियों में है, सत्तापक्ष के आश्वासन पर विपक्ष का हमला दोनों से उत्तराखंड में एक बार फिर से सियासत गरमा चुकी है। जहां एक ओर प्रदेश कांग्रेस अंकिता भंडारी मामले को लेकर लगातार न सिर्फ राज्य सरकार का घेराव कर रही है बल्कि सड़कों पर उतरकर जमकर विरोध प्रदर्शन भी कर रही है। तो वहीं सत्ताधारी भाजपा के खेमे से भी नए-नए सुर सामने आने लगे हैं। इस क्रम में हरिद्वार से भाजपा सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कड़े स्वर में कहा कि- इस तरह जघन्य अपराध करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाना चाहिए, आरोपी चाहे जो कोई भी हो, अपना बेटा या भी ही क्यूं न हो, कानून सभी के लिए समान है और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। वहीं भाजपा की पूर्व मंत्री विजय बड़थ्वाल ने उत्तराखंड सरकार से इस पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की है, उनका कहना है कि निष्पक्ष जांच से ही सच्चाई सामने आएगी और जनता का भरोसा कायम रह सकेगा।
अंकिता हत्याकांड CBI जांच हो, सच्चाई सामने आए
एक ओर भाजपा के खेमे से मामले की निष्पक्ष जांच की उठती आवाजें और दूसरी तरफ विपक्ष का लगातार सरकार को घेरना प्रदेश राजनीति को गरमा रहा है। भाजपा नेताओं के इन बयानों के बाद कांग्रेस ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला। कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता प्रतिमा सिंह ने कहा कि अब सच्चाई खुद भाजपा के ही घर से बाहर आ रही है, उन्होंने आरोप लगाया कि जो भाजपा के पूर्व विधायक की पत्नी हैं उस महिला ने सामने आकर सच बताया है। प्रतिमा सिंह ने भाजपा पर हमला करते हुए कहा कि एक ओर तो भाजपा बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की बात करती है, जबकि दूसरी ओर इस तरह का चेहरा जनता के सामने आ रहा है, उन्होंने सवाल उठाया कि जब भाजपा के सांसद और पूर्व मंत्री खुद सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं, तो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस मामले में खामोश क्यों हैं ? कांग्रेस ने मांग की है कि इस पूरे मामले की सीबीआई जांच कराई जाए और किसी निष्पक्ष न्यायाधीश की निगरानी में जांच हो, ताकि दोषियों को सख्त सजा मिल सके।
वहीं कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए भाजपा प्रदेश प्रवक्ता मथुरा दत्त जोशी ने कांग्रेस पर पलटवार किया। प्रवक्ता जोशी ने कहा कि फिलहाल यह मामला अदालत में विचाराधीन है, SIT जांच भी हो चुकी है और राज्य सरकार इसे गंभीरता से ले रही है। उन्होंने आगे कहा कि अदालत का अंतिम फैसला आने के बाद यदि आवश्यक्ता पड़ी तो सरकार आगे की कार्रवाई भी करेगी, मथुरा दत्त जोशी ने यह भी कहा कि हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन सरकार कानून और न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही फैसले लेगी।


