अंकिता भंडारी हत्याकांड फिर चर्चा में, हत्या को आत्महत्या बनाने के लिए कौन कर रहा साजिश…?

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उत्तराखंड में बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। सजा के ऐलान के बाद जहां एक ओर पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ हलकों में फिर से तथाकथित “वीआईपी” का नाम उछालकर पूरे प्रकरण को राजनीतिक रंग देने की कोशिशें सामने आ रही हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने आम जनता के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। गौरतलब है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड की विवेचना और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान अदालत में किसी भी स्तर पर किसी वीआईपी व्यक्ति के नाम का उल्लेख नहीं हुआ। ट्रायल के दौरान अदालत ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा था कि “यह नहीं कहा जा सकता कि जांच किसी विशेष प्रभावशाली या हाई-प्रोफाइल व्यक्ति को बचाने की दिशा में की जा रही है।” इसके बावजूद एक बार फिर सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर बिना ठोस सबूतों के वीआईपी नाम को उछालकर माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया जा रहा है। यह भी उल्लेखनीय है कि पीड़िता अंकिता के परिजनों की मांग पर राज्य सरकार ने विशेष लोक अभियोजक तक बदले थे। उस दौरान भी नए अधिवक्ता द्वारा अदालत के समक्ष किसी भी प्रकार के वीआईपी संलिप्तता का दावा नहीं किया गया। ऐसे में अब दोषियों को सजा मिलने के बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर किसके इशारे पर इस जघन्य हत्या को आत्महत्या बताने या मामले को दोबारा विवादित बनाने की कोशिश की जा रही है। इन्हीं सवालों और आरोपों के बीच शुक्रवार को कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने भाजपा प्रदेश मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में अंकिता भंडारी हत्याकांड पर राज्य सरकार की स्थिति स्पष्ट की। मंत्री उनियाल ने कहा कि यह मामला बेहद संवेदनशील है और सरकार ने शुरू से ही इसमें निष्पक्ष, पारदर्शी और कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की है।
उन्होंने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही तत्काल एक महिला आईपीएस अधिकारी के नेतृत्व में विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया। जांच के दौरान सभी नामजद आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और सरकार की ओर से प्रभावी पैरवी की गई। इसी का परिणाम रहा कि पूरी विवेचना और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान किसी भी आरोपी को जमानत नहीं मिल सकी। मंत्री उनियाल ने यह भी स्पष्ट किया कि विवेचना के दौरान सीबीआई जांच की मांग को लेकर माननीय उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई थी। इस पर नैनीताल हाईकोर्ट ने SIT की जांच पर भरोसा जताते हुए सीबीआई जांच की आवश्यकता से इंकार कर दिया। इसके बाद यह मामला सर्वोच्च न्यायालय तक भी गया, जहां शीर्ष अदालत ने भी विवेचना से संतुष्टि व्यक्त करते हुए याचिका को खारिज कर दिया।
उन्होंने बताया कि SIT द्वारा गहन और विस्तृत जांच के बाद अभियुक्तों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई और निचली अदालत में सुनवाई पूरी होने के उपरांत दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। यह फैसला इस बात का प्रमाण है कि सरकार और जांच एजेंसियों ने किसी भी दबाव में आए बिना कानून के अनुसार कार्रवाई की।
कैबिनेट मंत्री ने हाल में सोशल मीडिया पर वायरल हो रही ऑडियो क्लिप्स का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इन ऑडियो क्लिप्स के संबंध में अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की गई हैं और उनकी विधिवत जांच जारी है। यदि जांच के दौरान कोई नया तथ्य या साक्ष्य सामने आता है तो उसके आधार पर कानून के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी।
साथ ही मंत्री उनियाल ने यह भी भरोसा दिलाया कि यदि कोई व्यक्ति इस मामले से संबंधित ठोस साक्ष्य उपलब्ध कराता है तो सरकार उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करेगी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार न्याय के साथ खड़ी है और किसी भी सूरत में पीड़िता को न्याय से वंचित नहीं होने दिया जाएगा।
फिलहाल, अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर उठ रहे नए सवालों और आरोपों ने एक बार फिर प्रदेश की राजनीति और जनमानस में हलचल पैदा कर दी है।