उत्तराखंड का पहाड़ी हिस्सा बेहद संवेदनशील है। लेकिन इसके लिए विकास भी जरूरी है मगर अनियोजित विकास तरक्की की असहय प्रसव पीड़ा की वेदना को और भी ज्यादा बढ़ा देता है। ऐसे में पहाड़ के मिजाज को समझना भूगर्भ वैज्ञानिकों के लिए बेहद जरूरी है। धरती के मिज़ाज को समझने वाले वैज्ञानिक लगातार अपने काम में लगे हुए हैं ताकि उत्तराखंड के पहाड़ी भूभाग की जरूरतों को समझा जाए और जिम्मेदारों को इससे वाकिफ कराया जाए।
आने वाली 22 अप्रैल को पृथ्वी दिवस के दिन देहरादून के वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी, में एक कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। जिसमें हिमालयी क्षेत्र में आपदाओं तथा उनसे जुड़े विभिन्न वैज्ञानिक एवं समसामयिक विषयों पर चर्चा की जाएगी। ताकि उत्तराखंड के विकास के लिए एक माकूल माहौल बन सके।
इसके लिए संस्थान में एक बैठक हुई जिसमें हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र रावत शामिल हुए। बैठक में संस्थान के निदेशक डॉ. विनीत गहलोत, वैज्ञानिक डॉ. दीपक भट्ट समेत तमाम विशेषज्ञों के साथ पृथ्वी दिवस के दिन आयोजित की जाने वाली कार्यशाला की रूपरेखा, विषयवस्तु तथा हिमालयी क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन एवं सतत विकास से जुड़े पहलुओं पर चर्चा की गई। बहरहाल सबको पृथ्वी दिवस का इंतजार है और इस अवसर पर आयोजित कार्यशाला का ताकि जो सार हासिल हो उसका फायदा उत्तराखंड को मिल सके।

