उत्तराखंड के 1.5 लाख कर्मचारियों के लिए सख्त आदेश: अब तैनाती वाले जिले में आश्रित परिजन नहीं चला सकेंगे बीमा एजेंसी

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देहरादून। उत्तराखंड शासन के कार्मिक विभाग ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों के लिए आचरण नियमावली में कड़े संशोधन करते हुए नई व्यवस्था लागू कर दी है। नए नियमों के तहत अब सरकारी कर्मचारियों के पूरी तरह आश्रित परिजन उसी जिले में बीमा एजेंट के रूप में काम नहीं कर पाएंगे, जहां कर्मचारी खुद तैनात हैं।

इस संबंध में अपर सचिव कार्मिक गिरधारी सिंह रावत की ओर से कर्मचारी आचरण नियमावली में संशोधन का औपचारिक आदेश जारी कर दिया गया है। शासन को लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि कई अधिकारी और कर्मचारी अपने परिजनों के नाम पर बीमा एजेंसी चला रहे हैं।

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जांच में सामने आया था कि कर्मचारी अपने पद और प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए ठेकेदारों और अन्य लोगों से जबरन बीमा पॉलिसी करवा रहे थे। इन्हीं गंभीर शिकायतों का संज्ञान लेते हुए शासन ने इसे कर्मचारी आचरण सेवा नियमावली में शामिल कर सख्ती बढ़ा दी है। नियमों को सख्त बनाते हुए कार्मिक विभाग ने स्पष्ट किया है कि कोई भी कर्मचारी बिना विभागीय अनुमति के पट्टा या भूमि की खरीद-फरोख्त नहीं कर सकेगा। कर्मचारियों को अपनी संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक करना होगा और किसी भी जमीन की खरीद के लिए पहले विभाग से अनुमति लेनी होगी।

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दूसरी तरफ, शासन ने कर्मचारियों को एक बड़ी राहत भी दी है। पूर्व में चल संपत्ति खरीद की जो सूचना सीमा मात्र पांच हजार रुपये थी, उसे लेकर कर्मचारियों में भारी असंतोष था, जिसे अब बढ़ा दिया गया है। अब नई व्यवस्था के तहत यदि कोई कर्मचारी अपने दो महीने के मूल वेतन से अधिक मूल्य की चल संपत्ति खरीदता है, तो उसे एक महीने के भीतर इसकी सूचना विभाग को देनी होगी। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद कार्मिक विभाग ने इसके आदेश भी जारी कर दिए हैं।

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वर्तमान में उत्तराखंड में लगभग 70 हजार सरकारी कर्मचारी और करीब 80 हजार निगम कर्मचारी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इन सभी कर्मचारियों पर संशोधित आचरण नियमावली के ये नए प्रावधान पूरी तरह लागू होंगे। सचिव कार्मिक शैलेश बगोली ने बताया कि कर्मचारी संगठनों द्वारा दिए गए सुझावों और जायज मांगों के आधार पर ही नियमों में आवश्यक संशोधन किए गए हैं। कैबिनेट के अनुमोदन के बाद जारी इस आदेश का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक कामकाज में पारदर्शिता लाना है।