उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार को चार साल से भी अधिक का समय हो चुका है, तो वहीं राज्य सरकार के लिए साल 2025 कई मायनों में अहम साबित हुआ। एक ओर जहां राज्य सरकार को समान नागरिक संहिता, नकल विरोधी कानून, सख्त भू-कानून, धर्मांतरण और लैंड जिहाद के खिलाफ कार्रवाई जैसे फैसलों ने एक स्पष्ट और मजबूत राजनीतिक पहचान दी, तो वहीं साल 2025 में राज्य सरकार के इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार सृजन, निवेश और पर्यटन को लेकर कई अहम निर्णयों से राज्य की विकास यात्रा रथ अग्रगामी दिखाई दिया।
हालांकि, बीते चार सालों में विकास और अहम फैसलों के बीच एक मुद्दा ऐसा भी रहा , जो लगातार चर्चाओं में बना रहा और वह है- “मुख्यमंत्री परिवर्तन की अफवाहें”। बीते चार सालों में करीब 20 से भी ज्यादा बार मुख्यमंत्री परिवर्तन की भ्रामक खबरें सामने आईं, इसे लेकर कभी संगठनात्मक बदलाव के कयास लगाए गए, तो कभी दिल्ली दरबार से जुड़ी अटकलें तेज़ हुईं। हर बार, मौके-मौके पर उत्तराखंड में मुख्यमंत्री परिवर्तन की चर्चाएं सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में जोर पकड़ती रही, लेकिन हर बार यह सभी चर्चाएं अफवाहें ही साबित हुईं। वहीं भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने कहा कि ये सब विपक्ष की हताशा का नतीजा है, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड ने हर क्षेत्र में विकास के नए आयाम छुए हैं। मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड को न सिर्फ देश बल्कि दुनिया में एक नई पहचान मिली है, हालांकि, उत्तराखंड का हर क्षेत्र में नाम कमाना और उसकी अग्रशीलता कुछ असंतुष्ट लोगों और कांग्रेस को यह रास नहीं आ रहा। अब चूंकि 2027 के चुनाव नज़दीक हैं और मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में भाजपा की हैट्रिक तय दिख रही है, इसी वजह से इस तरह की भ्रामक अफवाहें फैलाई जा रही हैं।
मुख्यमंत्री परिवर्तन पर कांग्रेस का वार
उत्तराखंड एक छोटा पर्वतीय राज्य होने के साथ-साथ रणनीतिक तौर पर एक बड़ा कायदा रखता है। वहीं उत्तराखंड जैसे छोटे लेकिन रणनीतिक राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं अक्सर राजनीतिक दबाव बनाने या अस्थिरता का माहौल खड़ा करने का जरिया बनती हैं। हालांकि, पार्टी संगठन और केंद्रीय नेतृत्व की ओर से हर बार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर भरोसा जताया गया, लिहाजा विपक्ष और अन्य प्रश्नकर्ताओं की चिंताओं पर समय-समय पर पूर्ण विराम लगता रहा। जबकि, उत्तराखंड कांग्रेस ने इन अफवाहों को भाजपा की अंदरूनी गुटबाज़ी का नतीजा करार दिया है। इस संदर्भ में कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता शीशपाल सिंह बिष्ट का कहना है कि मुख्यमंत्री बदलने की खबरें बार-बार भाजपा के भीतर से ही निकलती हैं। यह साफ दर्शाता है कि भाजपा के अंदर ही असंतोष है, पूर्व मुख्यमंत्रियों और वर्तमान मुख्यमंत्री के बीच सामंजस्य की कमी है। इस तरह की अफवाहें प्रदेश में अस्थिरता पैदा करती हैं और विकास को प्रभावित करती हैं, लेकिन भाजपा अपने सत्ता के अहंकार में यह सब नहीं देख पा रही।
कैसा रहा उत्तराखंड का साल 2025
बहरहाल, कुल मिलाकर साल 2025 में जब-जब सरकार ने कोई बड़ा फैसला लिया या चुनावी रणनीतियों पर चर्चा तेज़ हुई, तब-तब मुख्यमंत्री बदलने की अफवाहों ने फिर सिर उठाया, लेकिन धरातलिय स्थिति यह रही कि प्रदेश की भाजपा सरकार ने पूरे साल स्थिरता के साथ काम किया और योजनाओं के क्रियान्वयन को अपना लक्ष्य बनाए रखा। इस प्रकार साल 2025 उत्तराखंड के लिए विकास, फैसलों और राजनीतिक चर्चाओं का मिला-जुला साल रहा, जहां सरकार ने कई अहम कदम उठाए, वहीं मुख्यमंत्री बदलने की अफवाहें एक बार फिर बेबुनियाद साबित हुईं। अब देखना यह होगा कि आने वाले समय में उत्तराखंड की राजनीति में फैली इन अफवाहों के कोहरे को छांटकर भाजपा सरकार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में विकास के एजेंडे पर कितनी मजबूती से टिक पाती है।


