देहरादून। गृहमंत्री अमित शाह के ऋषिकेश दौरे के दौरान आयोजित कार्यक्रम में उस समय माहौल अचानक राजनीतिक रंग में रंग गया, जब मंच संचालन कर रहे महानुभाव ने मौजूदा हालात पर एक गंभीर और तीखा शेर पढ़ दिया। मंच पर देश के गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मौजूद थे, वहीं हजारों की संख्या में कार्यकर्ता और आम लोग कार्यक्रम से जुड़े हुए थे। शेर सुनते ही पंडाल में कुछ पल के लिए सन्नाटा छा गया, फिर तालियों की गूंज सुनाई दी।
मंच संचालक ने शेर पढ़ते हुए कहा—
“बचे दो-चार ही पत्ते बाहर लाने को बड़ी बेताब है आंधी इसे गिराने को,
साखों से टूट जाएं हम वो पत्ते नहीं, आंधियों से कह दो अपनी औकात में रहे।”
इस शेर को सुनते ही राजनीतिक गलियारों में इसके निहितार्थों को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। माना जा रहा है कि यह शेर सीधे तौर पर मौजूदा राजनीतिक माहौल, विरोधियों की सक्रियता और सरकार पर उठ रहे सवालों की ओर इशारा करता है। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इसे सीएम के आत्मविश्वास और मजबूती का प्रतीक माना, जबकि विरोधी खेमे में इसे राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
सूत्रों की मानें तो राज्य में इन दिनों जिस तरह से राजनीतिक बयानबाजी, आरोप-प्रत्यारोप और अस्थिरता की चर्चाएं चल रही हैं, उस संदर्भ में यह शेर बेहद सटीक बैठता है। शेर के जरिए यह संदेश देने की कोशिश मानी जा रही है कि सरकार और संगठन किसी भी आंधी से डरने वाले नहीं हैं और विरोध की आवाजों को उनकी “औकात” में रहने की नसीहत दी जा रही है।
कार्यक्रम के दौरान गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पूरी तरह गंभीर मुद्रा में नजर आए। हालांकि दोनों नेताओं ने शेर पर कोई प्रत्यक्ष प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन मंच पर मौजूद वरिष्ठ जन और कार्यकर्ताओं के चेहरों पर संतोष और उत्साह साफ झलक रहा था। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह के प्रतीकात्मक संदेश अक्सर सीधे बयान से ज्यादा प्रभाव छोड़ते हैं और संगठन के भीतर एकजुटता का संकेत देते हैं।
कुल मिलाकर, ऋषिकेश में हुआ यह कार्यक्रम केवल एक सरकारी या राजनीतिक आयोजन भर नहीं रहा, बल्कि मंच से बोले गए एक शेर ने पूरे आयोजन को राजनीतिक संदेश से जोड़ दिया। अब यह शेर सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है और आने वाले दिनों में इसके मायने अलग-अलग तरीके से निकाले जाते रहेंगे।


