धाकड़ धामी सरकार के 2025 के ऐतिहासिक फैसले, उत्तराखंड के विकास को मिली नई दिशा….. हर क्षेत्र में हुआ व्यवस्था सुधार…

ख़बर शेयर करें

देहरादून। वर्ष 2025 उत्तराखंड की राजनीति और शासन व्यवस्था के लिहाज से एक अहम साल साबित हो रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने कई ऐसे बड़े और ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं, जिन्होंने सामाजिक सशक्तिकरण, आर्थिक मजबूती और प्रशासनिक सुधारों को नई गति दी है। इन फैसलों को राज्य के दीर्घकालीन और संतुलित विकास की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है।
धामी सरकार का सबसे महत्वपूर्ण कदम महिलाओं के लिए व्यापक नीति रहा है। यह नीति उत्तराखंड में पहली बार लागू की जा रही है, जिसका उद्देश्य महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक सशक्तिकरण को मजबूती देना है। नीति के तहत महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर, सुरक्षा व्यवस्था, आर्थिक स्वावलंबन और नेतृत्व क्षमता को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया गया है। सरकार का मानना है कि महिलाओं का सशक्तिकरण ही राज्य के समग्र विकास की बुनियाद है। इसके साथ ही सरकार ने सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 30 प्रतिशत आरक्षण देकर एक बड़ा सामाजिक निर्णय लिया है। यह कदम न केवल रोजगार में समानता को बढ़ावा देगा, बल्कि महिलाओं की भागीदारी को प्रशासन और नीति निर्माण में भी मजबूत करेगा। सहकारिता समितियों में भी महिलाओं की हिस्सेदारी सुनिश्चित की गई है, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में महिला सशक्तिकरण को बल मिलेगा।
आर्थिक और भौतिक विकास की बात करें तो सड़क नेटवर्क और बुनियादी ढांचे के विस्तार को लेकर भी 2025 में अहम पहल की गई है। मुख्यमंत्री धामी ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के साथ महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर चर्चा की, जिनमें NH-07 के बिंदाल और रिस्पना के बीच प्रस्तावित 26 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड सड़क परियोजना शामिल है। इससे यातायात व्यवस्था सुधरने के साथ-साथ देहरादून शहर को जाम की समस्या से भी राहत मिलने की उम्मीद है।
राज्य सरकार ने औद्योगिक, शहरी और पर्यटन विकास को गति देने के लिए कई नीतिगत सुधार लागू किए हैं। टैक्स में राहत, निवेश को प्रोत्साहन और पर्यटन ढांचे के विस्तार से उत्तराखंड को एक आकर्षक निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है। इससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होने की संभावना है।
शिक्षा के क्षेत्र में भी धामी सरकार ने अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थानों को लेकर ऐतिहासिक कानून को मंजूरी दी है। इस कानून के तहत मदरसा बोर्ड को समाप्त कर सभी अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थानों को मुख्यधारा की शिक्षा प्रणाली से जोड़ा जाएगा, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता और पारदर्शिता बढ़ेगी।
इसके अलावा भर्ती सुधार, अनुबंध कर्मचारियों के नियमितीकरण और रोजगार सृजन को लेकर सरकार लगातार कदम उठा रही है। वहीं औद्योगिक और पर्यटन क्षेत्र में 12 प्रमुख प्रस्तावों को कैबिनेट की मंजूरी मिलना राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
खनन क्षेत्र में भी उत्तराखंड ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। खनन सुधारों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के चलते राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना और केंद्र सरकार से लगभग 200 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन मिला है, जिससे पारदर्शिता और ई-गवर्नेंस को बढ़ावा मिला है।
कुल मिलाकर, धामी सरकार के ये फैसले वर्ष 2025 को उत्तराखंड के लिए विकास, सुधार और सशक्तिकरण का एक ऐतिहासिक वर्ष बनाते हैं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार द्वारा लिए गए ऐतिहासिक फैसलों में राज्य की सफल आबकारी नीति को एक अहम उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। इस नीति ने न केवल राज्य के राजस्व को मजबूती दी है, बल्कि उन शराब कारोबारियों को भी दोबारा खड़ा होने का अवसर दिया है, जो पूर्व में इस व्यवसाय से तौबा कर चुके थे और आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रहे थे।
नई आबकारी नीति के तहत सरकार ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए राजस्व वृद्धि के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक पहलुओं का भी ध्यान रखा है। नीति में स्थानीय लोगों को रोजगार से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित हुए। इसके साथ ही उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण और नियंत्रित दरों पर उत्पाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई, जिससे अवैध शराब के कारोबार पर भी प्रभावी अंकुश लगा।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि आबकारी नीति केवल राजस्व अर्जन का माध्यम नहीं, बल्कि एक सुव्यवस्थित और पारदर्शी व्यवस्था है। कारोबारी वर्ग के लिए नियमों को स्पष्ट और व्यावहारिक बनाया गया, जिससे ईमानदारी से काम करने वाले ठेकेदारों को सुरक्षा और स्थिरता मिल सके। इससे वे कारोबारी भी दोबारा इस क्षेत्र में लौटे, जिन्होंने पहले नुकसान या अनिश्चितता के कारण कारोबार छोड़ दिया था।
कुल मिलाकर, धामी सरकार की आबकारी नीति को एक संतुलित, रोजगारोन्मुख और राजस्ववर्धक नीति के रूप में देखा जा रहा है, जिसने राज्य की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।। इसके साथ ही सरकार ने वन्यजीव संघर्ष में मृतकों का परिजनों को मिलने वाले सहायता राशि बढ़ाने के साथ ही सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए।