पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत सुप्रीम कोर्ट के भूमि प्रकरण आदेश से जुड़े बापू ग्राम बचाओ संघर्ष समिति के धरना स्थल पर पहुंचे और आंदोलन को पूरे उत्तराखंड की लड़ाई करार दिया। उन्होंने कहा कि राज्य का गठन दशकों से बसे लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए हुआ था, न कि उन्हें बेघर करने के लिए। ऐसी स्थिति कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। रावत ने राज्य सरकार और मंत्रिमंडल से गंभीरता से सोचने की अपील की। अगर कोई दुविधा है तो सरकार खुद सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखे, क्योंकि यह नागरिकों का संवैधानिक हक है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि पंचायती राज अधिनियम से पहले ही इन बस्तियों को गांव का दर्जा मिल चुका था। रावत ने मुख्य सचिव से बात की है और मुख्यमंत्री से मंत्रिमंडल में फैसला लेने का आग्रह करेंगे। जरूरत पड़ी तो विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग भी उठाएंगे। उनका यह बयान भूमि विवाद को राजनीतिक रंग दे रहा है, जो स्थानीय निवासियों के हक की लड़ाई को मजबूत करेगा। पूर्व सीएम ने धरनाकारियों से बातचीत कर उनका हौसला बढ़ाया और कहा कि कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे पर सरकार के साथ खड़ी रहेगी। यह आंदोलन न केवल बापू ग्राम बल्कि पूरे राज्य के सीमांत इलाकों के लोगों के अधिकारों से जुड़ा है। रावत ने याद दिलाया कि उत्तराखंड आंदोलन का मूल मकसद स्थानीयों की जमीन और पहचान की सुरक्षा था। सरकार को जल्द कदम उठाना चाहिए वरना आंदोलन तेज होगा। इस घटना से राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ गई हैं।


