रायपुर थानें की हवालात में पीआडी कर्मचारी सुनील रतूड़ी तो मुर्दा हो गए लेकिन उनकी मौत के बाद कई सवाल उठ खड़े हुए हैं। सुनील के परिजनो का मानना है कि सुनील बहुत हंसमुख और जिंदादिल इंसान था। शराब जरूर पीता था, लेकिन कभी झल्लाया नहीं करता था।
ऐसे में सुनील का खुदकुशी करना परिजनो को गवारा नहीं है। परिजनो की माने तो सुनील के पास खुदकुशी की कोई वजह नहीं है। सुनील का देहरादनू में मकान है, उसकी मां को पेंशन मिलती है। पत्नी सरकारी अस्पताल में नर्स है वो खुद सरकारी कर्मचारी है,उसके दो प्यारे बच्चे हैं। जिनकी आम आदमी को हसरत होती है, जिनके लिए वो दिन रात एक करता है, वो सब सुनील के पास था तो फिर वो खुदकुशी क्यों करेगा। फिर भी अगर नौकरी में कोई प्रेशर रहा होगा तो उसके ऊपर नौकरी करने का भी कोई पारिवारिक दबाव नहीं था। पत्नी हर वक्त सुनील के साथ कंधे-से कंधा मिला कर खड़ी रहती थी तो फिर खुदकुशी क्यों और वो भी लॉकअप रूम में ? परिजनो को इस सुनाये हुए किस्से पर कतई ऐतबार नहीं हो रहा है।
सवाल ये भी उठा है कि जब उसी दिन दून कप्तान को रायपुर थाने के मुआयने के लिए आना था तो पुलिस को चौकस रहना चाहिए था। और अगर रायपुर पुलिस चौकस थी तो उन्होने सुनील को कबंल फाड़ते हुए क्यों नहीं देखा,और उसे फांसी का फंदा लगाते हुए क्यों नहीं देखा। जबकि लॉकअप कोई दूर नहीं था. मतलब रायपुर पुलिस ने आरोपी पर नजर रखना मुनासिब नहीं समझा. बहरहाल सुनील की मौत की वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पार्शियल हैंगिग बताई गई है.. जिसमें सुनील की मौत उसकी गर्दन की हड्डी के टूटने की वजह से हुई है।
हालांकि परिजनो के संदेह को देखते हुए सुनील की मौत की त्रिस्तरीय जांच के आदेश भी किए गए हैं। इससे पहले एएसी देहरादून ने मामले की गंभीरता को भांपते हुए रायपुर थाना इंचार्ज पर एक्शन लिया है.लेकिन परिजनो की नाराजगी और खाकी पर उठती उंगलियों को देखते हुए त्रिस्तरीय जांच की आदेश भी किए गए हैं।
बहरहाल पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच एस पी देहात जया बलूनी करेंगी. जबकि प्रशासनिक स्तर पर इस पूरे प्रकरण की मजिस्ट्रेटी जांच एसडीएम सदर करेंगे।ताकि सरकारी कर्मचारी सुनील रतूड़ी की मौत की गुत्थी सुलझ सके और दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। आखिरकार हो भी क्यों नहीं क्योंकि एक सरकारी कर्मचारी ने पुलिस हिरासत में मृत पाया गया।

