उत्तराखंड पावर सेक्टर में हलचल: जलविद्युत निगम MD संदीप सिंघल समेत 3 अधिकारी पदमुक्त

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उत्तराखंड शासन ने ऊर्जा निगम के प्रबंध निदेशक अनिल कुमार और जलविद्युत निगम के प्रबंध निदेशक संदीप सिंघल को सेवा विस्तार की अवधि पूरी होने से करीब साढ़े तीन माह पहले पद से हटा दिया है। ऊर्जा निगम के निदेशक परिचालन अजय अग्रवाल को भी तत्काल प्रभाव से पदमुक्त कर दिया गया। ये कार्रवाई ऊर्जा प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने मंगलवार को जारी आदेशों के जरिए की। दोनों निगमों के एमडी को अधिवर्षता आयु 30 जून 2024 से दो-दो वर्ष का सेवा विस्तार मिला था, लेकिन मार्च 2026 से पहले ही इन्हें हटाया गया, जिससे प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल दिखा। ऊर्जा निगम के निदेशक परियोजना अजय कुमार अग्रवाल को भी पद से अलग किया गया है। शासन ने जल्दी नए प्रभार सौंपे हैं। जलविद्युत निगम में यमुना वैली-प्रथम (डाकपत्थर) के महाप्रबंधक गजेंद्र सिंह बुदियाल को ऊर्जा निगम के प्रबंध निदेशक का अतिरिक्त चार्ज दिया गया है।

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वहीं, जलविद्युत निगम के प्रबंध निदेशक का पदभार भागीरथी वैली के महाप्रबंधक अजय कुमार सिंह को सौंपा गया, जो पहले से निगम के निदेशक परिचालन का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे हैं। यह बदलाव राज्य की बिजली व्यवस्था और जलविद्युत परियोजनाओं में नई गति लाने का संकेत देता है। ऊर्जा निगम उत्तराखंड की पावर सप्लाई और ग्रिड मैनेजमेंट का प्रमुख हिस्सा है, जबकि जलविद्युत निगम टिहरी, डाकपत्थर जैसी बड़ी परियोजनाओं का संचालन करता है। इन हटौतलों से स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि ये अधिकारी लंबे समय से पद पर थे। शासन का यह कदम दक्षता बढ़ाने और नई नेतृत्व क्षमता लाने की दिशा में लगता है। ऊर्जा विभाग में हाल के वर्षों में कई चुनौतियां रहीं, जैसे बाढ़ प्रभावित प्रोजेक्ट्स और पावर डिमांड में वृद्धि। नए प्रभारियों के पास मौका है कि वे इन मुद्दों को सुलझाएं। राज्य सरकार लगातार ऊर्जा क्षेत्र को मजबूत बनाने पर जोर दे रही है, जिसमें सोलर और हाइड्रो प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। यह खबर उत्तराखंड के पावर सेक्टर में रुचि रखने वालों के लिए महत्वपूर्ण है।