“रानीपोखरी के LPG उपभोक्ताओं की भी तो सुनो हुजूर”,मैसेज आया मगर सिलेंडर नहीं

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अंधा बांटे रेवड़ी बस अपनो को दे! या मजबूरी है, हूजूर जो पहले आएगा वहीं सिलेंडर पाएगा। हकीकत यही है और इसी अंदाज में जीना पड़ रहा है देहरादून में रानीपोखरी की जनता को। एलपीजी सिलेंडर की किल्लत एक तबके लिए बहुत भयंकर हो गई है। उसका जीना मुहाल हो गया है।

ऑयल कंपनी दूसरे सिलेंडर की बुकिंग की तरीख भेज चुकी हैं कि आप 26 अप्रैल को फिर एलपीजी रिफिल के लिए बुक करवा सकते हो। जबकि आलम ये है कि उपभोक्ता को पहली बुकिंग का सिलेंडर भी डिलीवर नहीं हुआ है। हकीकत ये है कि 13 मार्च को बुक किया हुआ सिलेंडर खबर लिखने तक कस्टमर को डिलीवर नहीं किया गया है। जबकि कंपनी का मैसेज है कि आपको सिलेंडर डिलीवर हो गया है। अगर से सच है तो फिर सवाल बड़ा हो जाता है कि आखिर सिलेंडर किसे दिया गया है। असली उपभोक्ता को या फिर किसी तिकड़मबाज को।

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गैस एजेंसी संचालक गैस गोदाम से सिलेंडर देने को तैयार नहीं और गैस डिलवर करने वाली गाड़ी मुहल्ले मे आने को तैयार नहीं। कोढ़ में खाज वाली बात ये है कि रानीपोखरी गैस ऐजेसी संचालक अपना फोन उठाने को तैयार नहीं। ऐसे में उपभोक्ता किस को अपनी तकलीफ सुनाए। सरकार कहती है गैस की किल्लत नहीं है, सबको सुचारू रूप से एलपीजी की आपूर्ति की जा रही है। लेकिन उपभोक्ता को समझ में नहीं आ रहा है कि, किसको एलपीजी डिलीवर की जा रही है।

सबसे बड़ी तकलीफ उन उपभोक्ताओं को है जिनके घर में उनके बुजुर्ग अभिभावक हैं या पत्नी जिसको दुपहिया वाहन चलाना नहीं आता और घर में छोटे बच्चे या जिनका घर मुख्य सड़क से हटकर दूर है किसी वाहन को किराये पर लिया नहीं जा सकता। उसको तो तभी गैस मिलेगी जब पहले की तरह गैस की गाड़ी उसके मुहल्ले में हॉर्न बजाएगी। इतना ही नहीं उन उपभोक्ता के सामने और भी कड़ा संकट है जो प्राइवेट नौकरी करते हैं। दरअसल उन्हें छुट्टी मिलेगी नहीं और अगर लाला ने मौके की नजाकत भांपकर दरियादिली से छुट्टी दे भी दी तो ये जरूरी नहीं कि उसे सिलेंडर उसके मुहल्ले में मिल जाए या आपाधापी के माहौल में चौक-चौराहों पर मिल जाए।

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ऐसे में जरूरी है कि, सिलेंडर का बंटवारा सलीके से किया जाए ताकि सरकार का इकबाल बुलंद रहे और उपभोक्ता को उसका वाजिब हक मिल जाए। जिसकी बुकिंग है उसी को एलपीजी सिलेंडर मिलना चाहिए। वरना जिंदगी को जीने के लिए तमाम तकलीफों में फंसे आम आदमी के लिए, एलपीजी सिंलेडर की किल्लत, मुंह से निवाला छिनने का सबब बन गई है।
आलम ये है कि उस शख्स के मुंह से भारी बददुआ निकल रही है जिसने रसोई गैस लेने के लिए पगार कटा कर छुट्टी ली है,बावजूद इसके उसको अपने मुहल्ले में सिलेंडर वाली गाड़ी नहीं दिखी वो इंतजार करता रहा और पड़ोसी के बेटे ने कहा, “चाचा गैस वालों ने बाजार में ही सिलेंडर बांट दिए”।

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ये “समाचार4U”की जनहित में की गई पड़ताल है, कोई सुना सुनाया किस्सा नहीं। लिहाजा जरूरत है चौकस रहने की, सरकार को भी और सिस्टम को भी, ताकि लोकतंत्र में ‘तंत्र’’लोक’ के लिए तकलीफ देय न बने। दुआ लो साहब, बददुआ नहीं!

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