उत्तराखंड के पर्यटन और लोक निर्माण मंत्री सतपाल महाराज ने मध्य पूर्व में जारी युद्ध और उसके वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ते नकारात्मक प्रभावों को देखते हुए बड़ी अपील की है। उन्होंने सरकारी और गैर-सरकारी, दोनों स्तरों पर संसाधनों के सही उपयोग और फिजूलखर्ची पर तत्काल रोक लगाने की जरूरत बताई है। महाराज के अनुसार, वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में वित्तीय अनुशासन और मितव्ययिता अपनाना समय की सबसे बड़ी मांग है।
वैश्विक युद्ध का अर्थव्यवस्था पर असर
सतपाल महाराज ने सोमवार को मीडिया को दिए बयान में स्पष्ट किया कि मध्य पूर्व के युद्ध का असर केवल उसी क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है। इसके कारण वैश्विक स्तर पर आर्थिक अस्थिरता पैदा हो रही है, जिससे विकासशील देशों के लिए भी चुनौतियां बढ़ गई हैं।
महंगाई और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान
मंत्री ने बताया कि युद्ध की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव हो रहा है। उन्होंने विशेष रूप से ‘सप्लाई चेन’ में आने वाले व्यवधान और बढ़ते ‘इन्फ्लेशन’ के दबाव की ओर इशारा किया। इन बाधाओं के कारण जरूरी वस्तुओं की कीमतें बढ़ रही हैं, जिससे आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ रहा है।
मितव्ययिता को प्राथमिकता देने की सलाह
बढ़ते आर्थिक दबाव को देखते हुए उन्होंने सलाह दी है कि हर स्तर पर बचत को प्राथमिकता देनी चाहिए। संसाधनों की बर्बादी को रोककर और फिजूलखर्ची से बचकर ही इस वैश्विक आर्थिक संकट का डटकर मुकाबला किया जा सकता है। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि वे वर्तमान समय की गंभीरता को समझें और अनावश्यक खर्चों में कटौती करें।

