उत्तराखंड में यूजीसी से जुड़े प्रावधानों के विरोध में संत समाज अब खुलकर सड़क पर उतर आया है। हरिद्वार के सर्वानंद घाट से शुरू हुई संतों की पदयात्रा सोमवार को मंगलौर पहुंची, जहां बड़ी संख्या में साधु-संतों और समर्थकों ने एकजुट होकर कानून के खिलाफ आवाज बुलंद की। दहियाकी शिव मंदिर में आयोजित सभा के दौरान महंत यति रामस्वरूपानंद गिरी के नेतृत्व में संतों ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि शिक्षा और परंपरा से जुड़े निर्णयों में धार्मिक संस्थाओं की अनदेखी स्वीकार नहीं की जाएगी।
संतों का कहना है कि यदि विवादित प्रावधानों को वापस नहीं लिया गया तो इसका व्यापक विरोध देशभर में देखने को मिलेगा। पदयात्रा के दौरान संत समाज इसे धर्म और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा का आंदोलन बताते हुए लगातार जनसमर्थन जुटा रहा है। संतों ने ऐलान किया कि यह यात्रा दिल्ली पहुंचकर 8 मार्च को रामलीला मैदान में बड़े शक्ति प्रदर्शन के साथ समाप्त होगी, जहां आगे की रणनीति तय की जाएगी। फिलहाल मंगलौर में पदयात्रा को लेकर माहौल पूरी तरह आंदोलनकारी नजर आया और प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।


