मंत्रिमंडल विस्तार की सुगबुगाहट तेज, देहरादून से दिल्ली तक नेता लगा रहे दौड़…मुख्यमंत्री धामी पर हाईकमान का भरोसा बरकरार, 2027 चुनाव से पहले टीम के पुनर्गठन की तैयारी…

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देहरादून — गुजरात के बाद अब उत्तराखंड की सियासत में भी मंत्रिमंडल फेरबदल की चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजधानी देहरादून से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है। भाजपा के कई वरिष्ठ और युवा नेता पार्टी हाईकमान से मुलाकात में जुटे हैं। कुछ नेता जहां अपनी कुर्सी बचाने की कवायद में लगे हैं, वहीं कई अन्य मंत्रिमंडल में शामिल होने की संभावनाओं को लेकर दिल्ली दरबार का चक्कर लगा रहे हैं।
भाजपा सूत्रों के अनुसार, आगामी कुछ हफ्तों में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपनी टीम में फेरबदल कर सकते हैं। इसके पीछे उद्देश्य प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने और जनता के बीच सरकार की छवि को और सशक्त करना बताया जा रहा है। मुख्यमंत्री धामी पर पार्टी हाईकमान का भरोसा पूरी तरह कायम है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि धामी के नेतृत्व में राज्य ने न केवल राजनीतिक स्थिरता हासिल की है बल्कि नीतिगत निर्णयों में भी तेजी आई है।
धामी सरकार के अब तक के कार्यकाल में आपदा प्रबंधन, महिला सशक्तिकरण, युवाओं को रोजगार और राज्य में निवेश आकर्षित करने जैसे कई मुद्दों पर उल्लेखनीय प्रगति देखने को मिली है। विशेष रूप से आपदाओं के दौरान मुख्यमंत्री धामी का सक्रिय और संवेदनशील रुख जनता के बीच उनकी लोकप्रियता को और मजबूत करता है। चाहे उत्तरकाशी में राहत कार्य हो या चमोली आपदा प्रभावित क्षेत्रों में लोगों से संवाद, धामी ने हर मौके पर जमीनी नेतृत्व का परिचय दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मुख्यमंत्री धामी अपनी कार्यशैली से “जनता के मुख्यमंत्री” की छवि बनाने में सफल हुए हैं। यही कारण है कि पार्टी हाईकमान उन्हें आगामी विधानसभा चुनाव 2027 के लिए मजबूत चेहरा मानता है। सूत्रों की मानें तो भाजपा आने वाले चुनाव में “मजबूत नेतृत्व, स्थिर सरकार” के नारे को लेकर आगे बढ़ेगी, जिसमें धामी की भूमिका केंद्र में रहेगी।हालांकि, मंत्रिमंडल विस्तार के संकेतों के बीच कई वर्तमान मंत्रियों में असहजता भी देखी जा रही है। कुछ मंत्री दिल्ली में पार्टी के शीर्ष नेताओं से संपर्क साधने में जुटे हैं ताकि वे अपने पद को बरकरार रख सकें। वहीं संगठन के स्तर पर भी नई पीढ़ी के कुछ नेताओं को जिम्मेदारी देने पर विचार किया जा रहा है, जिससे युवा नेतृत्व को बढ़ावा मिल सके।
बताया जा रहा है कि मंत्रिमंडल विस्तार की प्रक्रिया में जातीय और भौगोलिक संतुलन को भी ध्यान में रखा जाएगा। पहाड़ और मैदान दोनों क्षेत्रों से प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की कोशिश की जाएगी, ताकि हर वर्ग की आवाज सरकार तक पहुंचे।
इस बीच, मुख्यमंत्री धामी शांत लेकिन आत्मविश्वास भरे रुख में हैं। उन्होंने हाल ही में अपने एक बयान में कहा था कि “सरकार जनता के विश्वास से चलती है, कुर्सी के मोह से नहीं।” उनका यह बयान स्पष्ट करता है कि वे राजनीतिक समीकरणों से ऊपर उठकर जनहित को प्राथमिकता देने के पक्षधर हैं।कुल मिलाकर, उत्तराखंड की राजनीति में आने वाले कुछ दिन बेहद अहम साबित हो सकते हैं। एक ओर मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अटकलें जारी हैं, तो दूसरी ओर मुख्यमंत्री धामी का कद लगातार बढ़ता जा रहा है। अगर सबकुछ योजना के अनुरूप चला, तो भाजपा 2027 के चुनाव में एक बार फिर “धामी फैक्टर” के साथ मैदान में उतर सकती है — और यही इस समय राज्य की सियासत की सबसे बड़ी कहानी बन चुकी है।

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