उत्तराखंड में कानून व्यवस्था पर उठे सवाल: राजधानी दून में पत्रकार पर खुलेआम हमला, महिला सुरक्षा बना सवाल

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उत्तराखंड में कानून व्यवस्था इन दिनों मजाक बनकर रह चुकी है, प्रदेश की राजधानी देहरादून जो एक समय पर आचार्य द्रोण की तपोभूमि और अच्छी शिक्षा का केंद्र माना जाता था आज वही दून शहर अपराध का गढ़ बनता जा रहा है। आलम यह है कि एक हफ्ते के भीतर शहर में 3 कत्ल हो जाते हैं और किसी की जुबान पर इसका कोई जिक्र तक नहीं, अराजक तत्वों का साहस इतने चरम पर है कि भरे बाजार एक बेटी का गला रेत दिया जाता है, प्रतिष्ठित हस्तियों से लेकर सामान्य नागरिकों तक किसी पर भी हमला किया जाना अब खेल बन चुका है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या प्रशासन की ढील के कारण ऐसी आपराधिक गतिविधियां मजबूत हो रही हैं या फिर प्रशासन यह सब देख कर भी चुप्पी साधे बैठा है। वर्तमान समय में राजधानी देहरादून की तुलना वर्ष 2016 से पहले वाले बीमारु उत्तरप्रदेश से की जाए तो इसमें कोई दोराय नहीं है।

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सवाल उठता है कि क्या उत्तराखंड में सचमुच जंगलराज पैर पसार चुका है, आखिर क्यों प्रदेश में लगातार पत्रकारिता का गला घोंटा जा रहा है, आय दिन पत्रकारों की हत्या कहां तक जायज है और इस पर कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही?

आम जनता समेत चौथा स्तंभ दोनों असुक्षित


उत्तराखंड में आम जनता और महिलाओं की सुरक्षा कितनी पुख्ता है इस बात का प्रमाण हाल में हुआ गुंजन हत्याकांड है। यूं तो पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है परंतु प्रदेश में अब पत्रकारिता भी सुरक्षित नहीं है। राजधानी में अब आम जनता और पत्रकारिता दोनों स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। इसी क्रम में बीते शुक्रवार को देहरादून स्थित जय भारत टीवी के पत्रकार हेम भट्ट पर स्कूटी सवार तीन अज्ञात लोगों ने हमला कर दिया, प्राप्त जानकारी के अनुसार, पत्रकार हेम भट्ट कॉन्वेंट रोड स्थित अपने ऑफिस जय भारत टीवी से घर जा रहे थे, जब वे MKP चौक से आगे रेसकोर्स की ओर बढ़ रहे थे तो अचानक स्कूटी सवार तीन अज्ञात लोगों ने उनकी मोटर साईकिल को ओवरटेक कर उन्हें रोका। जिसके बाद स्कूटी सवार अज्ञात हमलावरों ने उनके साथ गाली-गलौज करते हुए मारपीट की और उन्हें खबरें चलाने को लेकर भी धमकाया।
हालांकि,SSP अजय सिंह ने बताया कि इस मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया है और विवेचना उप निरीक्षक नरेन्द्र कोटियाल चौकी प्रभारी आराघर को सौंपी गई है। वहीं घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फूटेज भी चेक की जा रही हैं और जल्द ही घटना में शामिल लोगों को चिन्हित करते हुए उनके विरुद्ध आवश्यक कार्यवाही की जायेगी।

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लेकिन सवाल अब भी वही है कि क्या उत्तराखंड में कानून व्यवस्था इतनी कमजोर हो चुकी है कि महिलाओं और पत्रकारों पर सरेआम हमले करना आसान हो चुका है। क्या राजधानी देहरादून में प्रशासन इतना कमजोर हो चुका है कि खुलेआम नरसंहार मचाने वाले आपराधिक तत्वों को कड़ा सबक नहीं सिखा पा रहा है। इस प्रकार के प्रश्न न केवल कानून व्यवस्था पर गंभीर चिंतन का विषय हैं बल्कि यह मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की जीरो टॉलरेंस नीति पर भी बड़ा प्रश्नचिह्म हैं।

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