प्राधिकरण के गलियारों में इन दिनों खामोश लेकिन तीखी सियासी–प्रशासनिक जंग चल रही है। सूत्रों के मुताबिक एक डीएम स्तर का अधिकारी प्राधिकरण के वर्तमान वीसी (उपाध्यक्ष) को हटाने की रणनीति में जुटा हुआ है। इस रणनीति के तहत न केवल शासन स्तर पर माहौल बनाया जा रहा है, बल्कि वीसी से कथित तौर पर प्रताड़ित कर्मचारियों से भी संपर्क साधा जा रहा है। उद्देश्य साफ है—वीसी के खिलाफ ऐसी शिकायतों की रूपरेखा तैयार करना, जो शासन के उच्च पदों तक पहुंचाई जा सके। बताया जा रहा है कि बीते कुछ समय से प्राधिकरण में कार्यरत कई अधिकारी और कर्मचारी वीसी की कार्यशैली से असंतुष्ट रहे हैं। इन्हीं असंतुष्ट कर्मचारियों को आधार बनाकर डीएम स्तर का अधिकारी शिकायत तैयार कराने में लगा है। सूत्रों का दावा है कि शिकायतों में प्रशासनिक उत्पीड़न निर्णयों में पारदर्शिता की कमी जैसे बिंदुओं को प्रमुखता से शामिल किया जा रहा है, ताकि शासन को यह संदेश दिया जा सके कि प्राधिकरण में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा।
हालांकि इस पूरे घटनाक्रम में कहानी का दूसरा पक्ष भी उतना ही दिलचस्प और चौंकाने वाला है। अंदरखाने की खबर यह है कि वीसी के हाथ कुछ ऐसे दस्तावेज लगे हैं, जिनमें कथित तौर पर उसी अधिकारी के इशारे पर हुए करोड़ों रुपये के घालमेल का ब्यौरा दर्ज है। बताया जा रहा है कि ये लेन-देन प्राधिकरण से जुड़े कुछ पुराने प्रोजेक्ट्स और ठेकों से संबंधित हैं, जिनकी फाइलें अब वीसी के पास पहुंच चुकी हैं। यहीं से मामला सिर्फ कुर्सी की लड़ाई नहीं, बल्कि “कुंडली” की जंग बन गया है। सूत्र बताते हैं कि जैसे-जैसे यह जानकारी सामने आई है, वैसे-वैसे संबंधित अधिकारी की बेचैनी बढ़ती जा रही है। हालात यह हैं कि सर्द रातों में भी अधिकारी को चैन की नींद नसीब नहीं हो पा रही। उसे वीसी के हाथ लगी उसी “कुंडली” का डर सता रहा है, जिसमें उसके कथित वित्तीय खेल का पूरा लेखा-जोखा होने की बात कही जा रही है। प्राधिकरण के भीतर चर्चा है कि अगर यह मामला खुलकर सामने आया, तो सिर्फ वीसी ही नहीं, बल्कि कई और चेहरे भी बेनकाब हो सकते हैं। इसी आशंका के चलते दोनों पक्ष अपने-अपने मोहरे सावधानी से चल रहे हैं। एक तरफ शिकायतों के जरिए वीसी को हटाने का प्रयास तेज है, तो दूसरी तरफ वीसी भी खुद को कमजोर नहीं मान रहे और सही समय का इंतजार कर रहे है। फिलहाल शासन स्तर पर इस पूरे घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है। सवाल यह है कि अंततः किसकी रणनीति कामयाब होगी—शिकायतों का पुलिंदा या घालमेल की कुंडली। इतना तय है कि प्राधिकरण में चल रही यह अंदरूनी जंग आने वाले दिनों में बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक भूचाल का कारण बन सकती है।


