अंकिता भंडारी हत्याकांड में नया मोड़: वीआईपी के दावों को पुलिस ने बताया निराधार, आत्महत्या की साजिश के दिए संकेत….

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देहरादून, उत्तराखंड में बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक बार फिर नया मोड़ सामने आया है। जहां एक ओर इस मामले में कथित “वीआईपी” के नाम को लेकर राजनेताओं के बीच जमकर राजनीति हो रही है, वहीं दूसरी ओर पुलिस ने पूरे प्रकरण पर परत-दर-परत तथ्यों को सामने रखकर कई अहम खुलासे किए हैं। जांच से जुड़े पुलिस अधिकारियों का साफ कहना है कि इस मामले में किसी भी तरह का कोई वीआईपी शामिल नहीं है और जानबूझकर भ्रम फैलाने का प्रयास किया जा रहा है। मामले की जांच कर रहे वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि जांच पूरी तरह से साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर की गई है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “इस केस में वीआईपी जैसा कुछ भी नहीं है। कुछ लोग राजनीतिक लाभ के लिए इस शब्द का इस्तेमाल कर जनता को गुमराह कर रहे हैं।” पुलिस का कहना है कि अब तक की जांच में किसी भी ऐसे व्यक्ति का नाम सामने नहीं आया है जिसे वीआईपी कहा जा सके। बुलडोजर कार्रवाई को लेकर भी पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। लगातार यह आरोप लगाए जा रहे थे कि बुलडोजर चलाने से घटनास्थल के अहम साक्ष्य नष्ट हो गए, लेकिन पुलिस ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। अधिकारियों के अनुसार, बुलडोजर कार्रवाई से पहले ही घटनास्थल की पूरी वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी कर ली गई थी। हर छोटे-बड़े साक्ष्य को सुरक्षित तरीके से रिकॉर्ड किया गया था। ऐसे में यह कहना कि साक्ष्य मिटा दिए गए, पूरी तरह से तथ्यहीन और भ्रामक है।पुलिस अधिकारियों ने यह भी कहा कि जांच के दौरान हर तकनीकी और वैज्ञानिक पहलू का ध्यान रखा गया। फॉरेंसिक जांच, वीडियो साक्ष्य, मोबाइल डेटा और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर पूरे घटनाक्रम को जोड़ा गया। अधिकारियों का कहना है कि जांच को किसी भी दबाव या प्रभाव से मुक्त रखा गया और कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई की गई।
इस बीच एक और अहम बिंदु पर पुलिस ने अपनी बात रखी है। अधिकारियों ने कहा कि दो लोगों की आपसी बातचीत को तोड़-मरोड़कर पेश करना और उसे इतनी बड़ी घटना से जोड़ना किसी दूसरी दिशा की ओर इशारा करता है। पुलिस के अनुसार, इस तरह की बातचीत को आधार बनाकर पूरे मामले पर सवाल खड़े करना एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिससे असली तथ्यों से ध्यान भटकाया जा सके।
पुलिस ने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि अंकिता की मौत को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की जा रही थी। जांच के दौरान सामने आए कुछ साक्ष्य इस ओर इशारा करते हैं कि एक सुनियोजित साजिश के तहत घटना को आत्महत्या बताने की तैयारी की जा रही थी। अधिकारियों के मुताबिक, सुरेश राठौड़ और उर्मिला सनावर के बीच हुई बातचीत में अंकिता के नहर में कूदने की बात कही गई है। यह बातचीत अपने आप में कई सवाल खड़े करती है और यह संकेत देती है कि मामले के पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।
पुलिस का कहना है कि इस तरह की बातचीत और घटनाक्रम को हल्के में नहीं लिया जा सकता। इन्हीं बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए जांच को आगे बढ़ाया गया और हर पहलू की गहराई से पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा और सच्चाई सामने लाने के लिए पुलिस पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है।
अंत में पुलिस ने जनता से अपील की है कि अफवाहों और राजनीतिक बयानबाजी पर ध्यान न दें, बल्कि जांच एजेंसियों पर भरोसा रखें। उन्होंने कहा कि कानून अपना काम कर रहा है और समय आने पर हर सवाल का जवाब तथ्यों के साथ जनता के सामने रखा