देहरादून, राज्य के सबसे बड़े सरकारी मेडिकल कॉलेज और चिकित्सा शिक्षा निदेशालय की कमान एक ही हाथ में होने का भरपूर फायदा चंद मुलाजिमो को मिल रहा है जो हुजूर के सबसे नजदीक है उनके लिए नियम बदले जा सकते है।। जी हां पहले श्रीनगर से दून मेडिकल कॉलेज में अटैचमेंट लाभ मिलता है और बाद में उक्त संविदा कर्मचारी को रहने के लिए सरकारी आवास की व्यवस्था भी कर दी जाती है ।। यह हुजूर की रहम दिली ही कही जा सकती है भले ही ऐसे मुलाजिम जो सरकारी व्यवस्था में स्थाई रूप से कार्यरत हैं उन्हें आवास मिले या ना मिले लेकिन हुजूर की कृपा दृष्टि जिन पर पड़ जाए उन्हें सारे नियम तांक पर रखकर भी सारी सुख सुविधा मिल सकती हैं।। इसका जीता जागता उदाहरण दून मेडिकल कॉलेज में दिखाई देगा।। विभाग के अधिकारी इस कृपा को एक नेता जी की सोर्स बता रहे है जबकि नियमों के ज्ञाता विभाग के भीष्म पितामह खुद ऐसी व्यवस्था को खुले तौर पर मना करते दिखाई देते है लेकिन जब नेता जी से नजदीकी बड़ने का कोई जरिया मिल जाए तो वो ऐसे मुलाजिमों को सुविधा देने के लिए कभी नहीं चूकते। कुर्सी पर रहने ले लिए सारे हथकंडे अपनाए जा रहे है जिससे नेता जी ऊपर तक जबरदस्त पहरवी कर सके।। अब भला जिन कर्मचारियों की नेताओ और अधिकारियों से नजदीकियां ना हो उनका क्या होगा ??
