देहरादून के एक नामी कॉलेज में एमबीए (MBA) चौथे सेमेस्टर के छात्र आयुष कुमार ने अपनी पढ़ाई जारी रखने और कॉलेज की फीस जमा करने के लिए अपनी किडनी बेचने का आत्मघाती फैसला किया। बिहार के समस्तीपुर का रहने वाला यह छात्र आर्थिक तंगी से जूझ रहा था और बैंक से लोन न मिल पाने के कारण उसने टेलीग्राम के जरिए किडनी तस्करों से संपर्क किया। किडनी का सौदा ₹9 लाख में तय हुआ था, लेकिन ऑपरेशन के बाद जालसाजों ने उसे केवल ₹3.50 लाख ही दिए। ठगे जाने के बाद जब छात्र ने पुलिस से मदद मांगी, तब इस बड़े अंतरराष्ट्रीय किडनी रैकेट का भंडाफोड़ हुआ।
डॉक्टर दंपत्ति समेत कई गिरफ्तार
पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस मामले में आईएमए (IMA) की उपाध्यक्ष डॉ. प्रीति आहूजा और उनके पति समेत कुल पांच डॉक्टरों और एक दलाल को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अभी भी दो अन्य डॉक्टरों और चार फरार आरोपियों की तलाश में छापेमारी कर रही है। आयुष ने बताया कि उसके पिता की मृत्यु के बाद परिवार की जिम्मेदारी उस पर थी। पढ़ाई छूटने के डर से वह इस दलदल में फंसा। ऑपरेशन कानपुर में किया गया, लेकिन सौदे के मुताबिक उसे पूरी रकम नहीं मिली। हैरानी की बात यह है कि पीड़ित छात्र खुद पुलिस के पास अपना बाकी पैसा दिलाने की गुहार लेकर पहुँचा था, जिसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।
लखनऊ और नोएडा के अस्पताल रडार पर
जांच के दौरान पुलिस को पता चला है कि इस अवैध कारोबार के तार लखनऊ और नोएडा के बड़े अस्पतालों से भी जुड़े हुए हैं। जब भी किसी मरीज की स्थिति बिगड़ती थी, तो उन्हें इन शहरों के अस्पतालों में शिफ्ट किया जाता था। पुलिस अब इन अस्पतालों की भूमिका और उनके साठगांठ की गहराई से जांच कर रही है। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि पीड़ित छात्र आयुष खुद भी कुछ संदिग्ध साइबर गतिविधियों और ‘म्यूल अकाउंट’ (फर्जी बैंक खाते) बनाने के काम में शामिल रहा है। पुलिस उसके अपराधियों के साथ संबंधों की भी डिटेल खंगाल रही है ताकि इस पूरे नेटवर्क की सच्चाई सामने आ सके।

