उत्तराखंड में आगामी चारधाम और हेमकुंड साहिब यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए उत्तराखंड पुलिस ने कमर कस ली है। डीजीपी दीपम सेठ ने यात्रा व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए सुरक्षा, यातायात और आपदा प्रबंधन के लिए पुख्ता रणनीति तैयार की है। इस बार यात्रा मार्गों की सीधी मॉनिटरिंग और स्थलीय निरीक्षण के लिए दो एडीजी (ADG) और चार आईजी (IG) रैंक के अधिकारियों को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। ये वरिष्ठ अधिकारी खुद मैदान में उतरकर पार्किंग, भीड़ प्रबंधन और यात्रियों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं की जमीनी हकीकत परखेंगे।
वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपी गई धामों की जिम्मेदारी
यात्रा के दौरान व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद रखने के लिए अलग-अलग धामों और महत्वपूर्ण पड़ावों के लिए विशिष्ट अधिकारियों की तैनाती की गई है:
- गंगोत्री धाम: एडीजी वी. मुरुगेशन
- बदरीनाथ धाम: एडीजी एपी अंशुमान
- केदारनाथ धाम: आईजी नीलेश आनंद भरणे
- यमुनोत्री धाम: आईजी अनंत शंकर ताकवाले
- हरिद्वार: आईजी विम्मी सचदेवा
- ऋषिकेश व लक्ष्मणझूला: आईजी सुनील कुमार इसके साथ ही आईजी गढ़वाल रेंज राजीव स्वरूप को चारधाम यात्रा का नोडल अधिकारी बनाया गया है।
सात हजार पुलिसकर्मी और एटीएस की तैनाती
पूरी यात्रा सुरक्षा के लिए 7000 पुलिसकर्मियों की भारी-भरकम फौज तैनात की जा रही है। सुरक्षा ग्रिड को और मजबूत बनाने के लिए धामों में एटीएस (ATS) की टीमें भी मौजूद रहेंगी, जो समय-समय पर मॉक ड्रिल के जरिए अपनी तैयारियों को परखेंगी। पूरे यात्रा क्षेत्र को 16 सुपर जोन, 43 जोन और 149 सेक्टरों में बांटा गया है ताकि हर गतिविधि पर बारीकी से नजर रखी जा सके।
आपदा प्रबंधन और यातायात की विशेष तैयारी
यात्रा मार्ग पर सुरक्षा के साथ-साथ प्राकृतिक चुनौतियों से निपटने के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। मार्ग में 80 स्थानों पर आपदा टीमें, 37 स्थानों पर एसडीआरएफ (SDRF) और 8 स्थानों पर एनडीआरएफ (NDRF) की टीमें तैनात की गई हैं। यातायात को सुचारू रखने के लिए 118 पार्किंग स्थल चिन्हित किए गए हैं। विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती 109 लैंडस्लाइड जोन, 274 दुर्घटना संभावित क्षेत्र और 61 ब्लैक स्पॉट होंगे, जहां 24 घंटे विशेष निगरानी रखी जाएगी।

