होली के मौके पर उत्तराखंड की राजनीति एक बार फिर चर्चा में आ गई। हरिद्वार के पूर्व सांसद और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल (सेनि.) भुवन चंद्र खंडूरी से उनके आवास पर मुलाकात कर आशीर्वाद लिया और इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कीं। तस्वीर सामने आते ही सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। जहां कुछ लोगों ने इसे होली के पावन अवसर पर वरिष्ठ नेता से आशीर्वाद लेने की परंपरा बताया, वहीं कई यूज़र्स ने पुराने राजनीतिक घटनाक्रमों को याद करते हुए तीखे कमेंट किए।
मुलाकात से खुले 2012 के पुराने किस्से
होली के अवसर पर उत्तराखंड की राजनीति में एक नया मोड़ देखने को मिलता है, जहाँ पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता मेजर जनरल (से.) भुवन चंद्र खंडूरी से उनके आवास पर मुलाकात कर आशीर्वाद लए। इस मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होते ही लोगों की राय में बंटवारे देखने को मिले हैं; कुछ ने इसे पुराने राजनीतिक घटनाक्रम याद करते हुए कड़ा कमेंट किया, जबकि कई ने इसे सम्मान और सद्भाव की परंपरा बताया। विशेष तौर पर 2012 के राजनीतिक उलझनों को याद करते हुए कुछ ने कहा, “अगर उस समय साथ दिया होता तो आज उत्तराखंड की तस्वीर कुछ और होती,”
जबकि अन्य ने तंज कसते हुए कहा, “जो कभी राजनीतिक रूप से किनारे कर गए, आज वही आशीर्वाद लेने आए।” राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, जब खंडूरी एक सख्त और तेज-तर्रार मुख्यमंत्री की छवि के साथ आए थे, उसी समय पार्टी के भीतर समीकरण बदले थे और 2012 के विधानसभा चुनाव के बाद नेतृत्व परिवर्तन हुआ था, जिसके बाद निशंक मुख्यमंत्री बने थे। यह मुलाकात न केवल पुराने राजनीतिक समीकरणों को फिर से खोलती है बल्कि होली के रंगों के साथ राजनीतिक रंग भी घुलते नजर आ रहे हैं, जहाँ एक ओहदों के बीच सम्मान और पुरानी यादों का मिश्रण साफ नज़र आता है।
क्या है सियासी संदेश?
जहां एक ओर कुछ लोग होली जैसे पर्व पर हुई इस मुलाकात को “सद्भाव और सम्मान” का प्रतीक मान रहे हैं, तो वहीं कुछ लोगो के नजरिए में इसे पुराने राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देख रहे हैं। फिलहाल, एक मुलाकात ने उत्तराखंड की सियासत के पुराने अध्याय फिर से खोल दिए हैं और सोशल मीडिया पर होली के रंगों के साथ राजनीतिक रंग भी घुलते नजर आ रहे हैं।

