हल्द्वानी रेलवे भूमि विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अतिक्रमण हटाने के आदेश, कहा- रेलवे तय करेगी जमीन का उपयोग

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उत्तराखंड के हल्द्वानी में रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में बड़ी सुनवाई हुई, इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सीधे स्वर में फैसला सुनाते हुए कहा कि जिस जमीन पर लोग रह रहे हैं, वह रेलवे की है और उसका उपयोग किस तरह किया जाएगा, यह तय करने का अधिकार रेलवे के पास है। कोर्ट ने अपीलकर्ताओं की उस मांग को खारिज कर दिया, जिसमें उसी स्थान पर पुनर्वास की बात कही गई थी। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि प्रभावित परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पुनर्वास के लिए आवेदन कर सकते हैं। कोर्ट ने माना कि वहां रहने वाले अधिकांश लोग आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS श्रेणी में आते हैं और योजना का लाभ लेने के पात्र हो सकते हैं।

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कोर्ट ने नैनीताल के कलेक्टर और हल्द्वानी के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे पात्र लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना के आवेदन फॉर्म उपलब्ध कराएं और प्रक्रिया को आसान बनाएं, ताकि लोगों की रोजी-रोटी प्रभावित न हो। साथ ही राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव को 19 मार्च के बाद क्षेत्र में पुनर्वास शिविर लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इन शिविरों में हर परिवार के मुखिया को योजना के तहत आवेदन करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। कोर्ट ने साफ कहा है कि जब तक सभी परिवार आवेदन नहीं कर देते, तब तक शिविर लगाए जाते रहें। सुप्रीम कोर्ट ने 31 मार्च से पहले इस गतिरोध का व्यावहारिक समाधान निकालने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई अप्रैल में होगी। फिलहाल सभी की नजरें प्रशासनिक कार्रवाई और पुनर्वास प्रक्रिया पर टिकी हैं।