उत्तराखंड के मेडिकल कॉलेजों में होगी इलेक्ट्रिकल इंजीनियरों की भर्ती

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उत्तराखंड के सरकारी मेडिकल कॉलेजों और उनसे संबद्ध अस्पतालों की व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए एचएनबी उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय ने एक बड़ा फैसला लिया है। अब अस्पतालों में बिजली, पानी, निर्माण और फायर सेफ्टी जैसे तकनीकी कार्यों की जिम्मेदारी विशेषज्ञ इंजीनियर संभालेंगे। इस कदम का मुख्य उद्देश्य डॉक्टरों को प्रशासनिक और तकनीकी उलझनों से मुक्त करना है, ताकि वे अपना पूरा ध्यान मरीजों के इलाज और चिकित्सा शिक्षा पर लगा सकें। विश्वविद्यालय जल्द ही शासन को इन नियुक्तियों की सिफारिश भेजने जा रहा है।

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डॉक्टरों पर काम का अतिरिक्त बोझ होगा कम

वर्तमान व्यवस्था में अस्पतालों के भीतर बायोमेडिकल वेस्ट निस्तारण, बिजली-पानी की आपूर्ति और छोटे-मोटे निर्माण कार्यों के लिए डॉक्टरों को ही ‘नोडल अधिकारी’ बनाया जाता है। इससे डॉक्टरों का मूल कार्य प्रभावित होता है और वे तकनीकी समस्याओं को सुलझाने में ही उलझे रहते हैं। विशेषज्ञ इंजीनियरों की नियुक्ति के बाद डॉक्टरों को इन गैर-चिकित्सीय कार्यों के लिए सिर खपाने की जरूरत नहीं होगी।

तकनीकी विशेषज्ञों की कमी से जूझते संस्थान

विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. डॉ. भानु दुग्गल की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह चिंता जताई गई कि पूरे चिकित्सा शिक्षा विभाग के पास वर्तमान में केवल एक ही इंजीनियर तैनात है। किसी भी बड़े तकनीकी मुद्दे के लिए उन्हें दून, हल्द्वानी, श्रीनगर, हरिद्वार और अल्मोड़ा जैसे दूर-दराज के मेडिकल कॉलेजों के चक्कर काटने पड़ते हैं। इस कमी के कारण कॉलेजों को बाहरी एजेंसियों या आउटसोर्सिंग पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे कार्यों में देरी और गुणवत्ता की समस्या बनी रहती है।

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इन कार्यों के लिए नियुक्त होंगे विशेषज्ञ

नई योजना के तहत नियुक्त होने वाले इंजीनियर अस्पताल की बुनियादी सुविधाओं के रखरखाव के लिए जिम्मेदार होंगे। इसमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • विद्युत व्यवस्था: अस्पताल की बिजली और बैकअप सिस्टम की देखरेख।
  • सिविल निर्माण: भवन के छोटे-बड़े मरम्मत और निर्माण कार्य।
  • फायर सेफ्टी: अग्नि सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना।
  • बायोमेडिकल वेस्ट: कचरा निस्तारण की वैज्ञानिक और तकनीकी प्रक्रिया का प्रबंधन।