दुग्ध उत्पादकों को धामी सरकार की सौगात, दो रूपए प्रति लीटर ज्यादा मिलेगा दूध का दाम

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उत्तराखंड की धामी सरकार दूध उत्पादकों पर यूं ही नजरे इनायत करती रही तो नतीजे और बेहतर आएंगे। उम्मीद है कि आने वाले वक्त में राज्य का आंचल दूध, गुजरात के अमूल और पजाब के परम को टक्कर दे सके। सूबे के पशु पालन मंत्री सौरभ बहुगुणा की सोच का असर दिख रहा है। बहरहाल जिस रफ्तार से राज्य के मैदानी इलाकों में दुग्ध उत्पादन का ग्राफ बढ़ रहा है उसी हिसाब से पहाड़ी जिलों ने भी दुग्ध उत्पादन को अपनाया, तो वो दिन दूर भी नहीं है जब सूबे के पूरे दुग्ध बाजार पर आंचल ही आंचल हो।

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राज्य में पशुपालन और दुग्ध विकास मंत्रालय सूबे के पशुपालकों को जिस तरह की मदद दे रहा है उसका असर दिख रहा है। उधमसिंहनगर जिले में दुग्ध विकास में सात फीसद का इजाफा हुआ है। दुग्ध विकास के क्षेत्र में इसे एक बड़ी उछाल माना जा सकता है। राज्य के युवा पशुपालन और दुग्ध विकास मंत्री सौरभ बहुगुणा की सोच से उत्तराखंड मे दुग्ध विकास के क्षेत्र में बदलाव दिख रहा है। मंत्रालय राज्य के पशुपालकों को कई तरह की मदद दे रहा है।

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आंचल से जुड़े दुग्ध उत्पादकों को कई तरह की सब्सिडी दी जा रही हैं. मसलन साइलेज पर 60 फीसद की सब्सिडी तो भूसा और मिनरल मिक्चर पर 50 फीसद, तो पशु आहार पर 100 से 200 रूपए की छूट दी जा रही है..ताकि पशुपालकों की आमदनी बढ़ सके और राज्य में पशुपालन फायदे का रोजगार बन सके।इतना ही नहीं राज्य के पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा ने आंचल से जुड़े दुग्ध उत्पादकों को बैशाखी की बड़ी सौगात दी है। सौरभ ने कहा कि 15 अप्रैल से दुग्ध उत्पादन समिति से जुडे दुग्ध उत्पादकों को दो रूपए प्रति लीटर और दिए जाएंगे। तय है कि इस बढ़े हुए दाम से आंचल दूध उत्पादकों का काफी फायदा होगा।

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बहरहाल अभी दुग्ध उत्पादन और पशुपालन के क्षेत्र में और भी कुछ किए जाने की दरकार है ताकि राज्य के नौजवान स्वरोजगार की ओर कदम बढ़ाते हुए पशुपालन और दुग्ध व्यसाय को बेहिचक अपना सके. लिहाजा जरूरत है शिक्षा व्यवस्था में एक बड़े बदलाव की ताकि तालीम रोजगार का साधन बन सके। महज कागज़ी डिग्री बनकर बोझ न बने।

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