घर का जोगी जोगटा बाहर का जोगी संत वाली कहावत उत्तराखंड पर सटीक बैठती है.सबे के पहाड़. जल-जंगल जमीन, यहां की आबोहवा दूर-दराज के सैलानियों को लुभाती है, लेकिन स्थानीय ग्रामीणों को उनका गांव रोक नहीं पाता। रोजी रोटी,स्वास्थ्य और तालीम जैसे बुनियादी सवाल यक्ष प्रश्न बने हुए. अलग राज्य का मरहम भी पलायन के घाव को नहीं भर पाया है। नतीजा ये कि साल 2011 में हुई जनगणना के मुताबिक राज्य के 16 हजार 793 गांवों में से 1हजार 48 गांव “भूतहा” हो चुके थे। मतलब पलायन की मार से खाली हो चुके थे।
जिनमें सबसे ज्यादा गांव पौड़ी जिले में थे. गढ़वाल कमिश्नरी के पौड़ी जिले के तीन हजार चार सौ तिहत्तर गांवों में से 331 गांव भूतहा की श्रेणी में आ चुके थे। वहीं कुमांऊ कमिश्नरी के पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा जिले सबसे ज्यादा भूतहा गांवों का दंश झेल रहे थे। साल 2011 की गणना में अल्मोड़ा जिले में 105 गांव और पिथौरागढ़ जिले में 103 गांव घोस्ट विलेज का दंश झेलने को मजबूर थे. बहरहाल सूबे की ताजा तस्वीर क्या है, इसका पता भी जल्द चल जाएगा.
दरअसल राज्य में अगले महीने की 25 अप्रैल से जनगणना का काम शुरू हो जाएगा. उसके बाद ही पता चलेगा कि रिवर्स पलायन हुआ है या नहीं. दरअसल कोविड के दौर में, महानगरों से गांवों की ओर बड़ी तादाद में आबादी लौटी थी. वो सिर्फ रूकी थी या टिकी भी है इसका पता नई जनगणना में ही पता चल पाएगा. बहरहाल समाचार 4 U तो कामना करता है कि राज्य के किसी भी जिले में कोई गांव भूतहा न रहे। हर गांव आबाद हो और राज्य की तरक्की में अपना साथ दे.
उत्तराखंड: वर्ष 2011 में किस जिले में कितने घोस्ट विलेज
| जिला | कुल गांव | घोस्ट विलेज |
| उत्तरकाशी | 707 | 13 |
| चमोली | 1246 | 76 |
| रुद्रप्रयाग | 688 | 35 |
| टिहरी | 1862 | 88 |
| देहरादून | 748 | 17 |
| पौड़ी | 3473 | 331 |
| पिथौरागढ़ | 1675 | 103 |
| बागेश्वर | 947 | 73 |
| अल्मोड़ा | 2289 | 105 |
| चंपावत | 717 | 55 |
| नैनीताल | 1141 | 44 |
| उधम सिंह नगर | 688 | 14 |
| हरिद्वार | 612 | 94 |

