गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने भूमि धोखाधड़ी और नियमों के उल्लंघन के मामलों में कड़ा रुख अपनाते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त निर्देश जारी किए हैं। रुद्रप्रयाग में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहाँ राजस्थान के निवासियों ने आवासीय उद्देश्य के लिए जमीन खरीदी, लेकिन वहां होटल का निर्माण कर दिया। इसे उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम की धारा-154 का उल्लंघन मानते हुए, आयुक्त ने उक्त भूमि को राज्य सरकार में निहित (जब्त) करने और दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश दिए हैं। लैंड फ्रॉड समन्वय समिति की बैठक में कुल 170 मामलों में से कई का निस्तारण किया गया और भू-माफियाओं के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने की बात कही गई।
नियमों के उल्लंघन पर भूमि होगी जब्त
प्रशासनिक जांच में पाया गया कि रुद्रप्रयाग में खरीदी गई भूमि का उपयोग उस उद्देश्य के लिए नहीं किया गया जिसके लिए अनुमति ली गई थी। आवासीय भूमि पर व्यावसायिक गतिविधि (होटल संचालन) करने के कारण अब वह जमीन सरकार के कब्जे में ले ली जाएगी। इसके साथ ही ऋषिकेश और देहरादून के अन्य मामलों में भी जहां एक ही खसरे की भूमि को दो अलग-अलग लोगों को बेचने जैसी धोखाधड़ी पाई गई, वहां भी कड़ी कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
लैंड फ्रॉड के 77 मामलों की हुई सुनवाई
कमिश्नर की अध्यक्षता में हुई बैठक के दौरान लैंड फ्रॉड से जुड़े कुल 170 मामलों की समीक्षा की गई, जिनमें से 77 मामलों की सुनवाई पूरी हो चुकी है और 51 का सफल निस्तारण कर दिया गया है। आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि न्यायालय में लंबित मामलों को छोड़कर अन्य सभी फाइलों पर विभागीय स्तर पर त्वरित कार्रवाई की जाए ताकि पीड़ितों को जल्द न्याय मिल सके। शेष प्रकरणों की रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर तलब की गई है।
लापरवाह अधिकारियों पर नाराजगी और कार्रवाई
बैठक के दौरान आयुक्त ने उन अधिकारियों के प्रति कड़ी नाराजगी जताई जो जानकारी देने में विफल रहे या ड्यूटी से नदारद थे। भूमि धोखाधड़ी के एक प्रकरण में आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत न करने पर तहसीलदार को तत्काल ऋषिकेश भेजा गया और एक घंटे के भीतर विवरण उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया। साथ ही, बैठक में अनुपस्थित रहने वाले एसडीएम (SDM) सदर और ऋषिकेश से भी स्पष्टीकरण मांगा गया है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि भूमि संबंधी मामलों में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

