देहरादून। अंकित भंडारी हत्याकांड को लेकर एक बार फिर सियासी हलकों में हलचल तेज हो गई है। इस हाई प्रोफाइल मामले में कथित “वीआईपी” के नाम को लेकर उठ रहे सवाल अब नए मोड़ पर पहुंचते नजर आ रहे हैं। पहले जहां इस वीआईपी के तौर पर भाजपा के प्रदेश महामंत्री संगठन अजय कुमार का नाम चर्चा में था, वहीं अब यह नाम बदलकर भाजपा के प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम से जोड़ा जा रहा है। इस बदलाव ने न सिर्फ राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को हवा दी है, बल्कि इसे एक बड़े षड्यंत्र के तौर पर भी देखा जा रहा है।
सूत्रों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वीआईपी के नाम में इस तरह का परिवर्तन अजय कुमार के लिए जहां राहत की बात हो सकती है, वहीं दुष्यंत गौतम के खिलाफ इसे एक सोची-समझी साजिश के रूप में देखा जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच हरिद्वार और देहरादून में सुरेश राठौड़ और उर्मिला के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए जाने से मामला और अधिक पेचीदा हो गया है। इन मुकदमों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर वीआईपी के नाम को लेकर लगातार भ्रम और आरोप-प्रत्यारोप क्यों सामने आ रहे हैं।
गौरतलब है कि अंकित भंडारी हत्याकांड उत्तराखंड के सबसे हाई प्रोफाइल मामलों में शुमार रहा है। इस मामले ने न सिर्फ प्रदेश की राजनीति को झकझोर दिया था, बल्कि कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए थे। सरकार ने शुरुआत से ही इस मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया था। एसआईटी जांच, न्यायिक प्रक्रिया और लगातार निगरानी के बाद मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे पहुंचाया गया, जिसे सरकार की सख्ती के तौर पर देखा गया।
हालांकि, तमाम कार्रवाइयों के बावजूद कथित वीआईपी का नाम अब भी स्पष्ट रूप से सामने नहीं आ पाया है। यही वजह है कि यह नाम आज भी पहले की तरह “हवा में तैरता” हुआ नजर आता है। विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमलावर है और बार-बार यह सवाल उठा रहा है कि अगर सभी दोषियों को सजा दिलाने की बात कही जा रही है, तो फिर वीआईपी के नाम को लेकर स्थिति साफ क्यों नहीं हो पा रही।
वहीं, सत्तारूढ़ दल की ओर से इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज किया जा रहा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि हत्याकांड में दोषियों को सजा दिलाना सरकार की प्राथमिकता रही है और किसी निर्दोष को फंसाने की साजिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा। फिलहाल, वीआईपी के नाम को लेकर जारी यह सियासी संग्राम थमने का नाम नहीं ले रहा है और आने वाले दिनों में इस पर राजनीति और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।


