जिलाधिकारी चमोली पर अभद्रता और दबाव बनाने के आरोप, तमाम विभाग के कार्मिकों में रोष…

ख़बर शेयर करें

देहरादून जनपद चमोली में आबकारी विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार और दबाव बनाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस संबंध में दिनांक 03 अप्रैल 2025 को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें आबकारी विभाग के सभी अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए। बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े आबकारी अधिकारी दुर्गेश्वर कुमार त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि 31 मार्च को वे जिलाधिकारी संदीप तिवारी के समक्ष व्यवस्थापन संबंधित पत्रावली लेकर पहुंचे थे, लेकिन जिलाधिकारी ने उनके साथ गाली-गलौच और अभद्र व्यवहार किया। इसके बाद उन्हें कार्यालय से बाहर निकाल दिया गया और धमकी दी गई कि जब वे आबकारी कमिश्नर बनेंगे, तब उनके करियर को खत्म कर देंगे।

दबाव और मानसिक तनाव का आरोप

दुर्गेश्वर त्रिपाठी का कहना है कि जिलाधिकारी द्वारा किए गए दुर्व्यवहार और धमकियों के कारण उन्हें मानसिक तनाव हुआ, जिसके चलते उन्होंने अवकाश का आवेदन दिया, जिसे जिलाधिकारी ने लेने से इंकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने उसी दिन शाम को चमोली जनपद छोड़ दिया। आरोप है कि जिलाधिकारी को इसकी जानकारी होने के बावजूद उन्होंने साजिश के तहत आबकारी विभाग के सहायक लेखाकार और कनिष्ठ लिपिक को बुलाकर जबरन एक नोटशीट पर हस्ताक्षर कराने का दबाव बनाया।

यह भी पढ़ें -  उत्तराखण्ड ड्रग विभाग में हुई 18 नए औषधि निरीक्षकों की नियुक्ति, तैनाती आदेश जारी.

कर्मचारी संघों का विरोध, संयुक्त मोर्चा का गठन

बैठक में इस घटना की निंदा करते हुए सभी उपस्थित कर्मचारियों ने विरोध जताया। इससे पहले भी 18 मार्च को जिलाधिकारी द्वारा दुर्व्यवहार और अपमानजनक भाषा का प्रयोग करने का आरोप लगाया गया था। बैठक में यह भी आरोप लगाया गया कि 31 मार्च को शाम 6 बजे जिलाधिकारी ने आबकारी कर्मचारियों को अपने कैंप कार्यालय बुलाया और जबरन हस्ताक्षर करने का दबाव डाला। मना करने पर उन्हें धमकाया गया और फोन जब्त कर लिए गए।

यह भी पढ़ें -  नवरात्र में कुट्टू के आटे की बिक्री को लेकर सचिव डॉ0आर राजेश कुमार सख्त, नए दिशा-निर्देश जारी…

इस पूरे प्रकरण के खिलाफ आबकारी कर्मचारियों द्वारा “आबकारी कार्मिक संयुक्त मोर्चा” का गठन किया गया, जिसमें जिला आबकारी अधिकारी संघ, आबकारी निरीक्षक संघ, उप आबकारी निरीक्षक संघ, प्रधान/आबकारी सिपाही संघ और मिनिस्ट्रीयल स्टाफ संघ के सदस्य शामिल रहे।

यह भी पढ़ें -  उत्तराखंड में आबकारी नीति से व्यापारियों के चेहरे खिले, घाटे से मुनाफे की ओर बढ़ रहा विभाग..

अन्य विभागों का भी समर्थन

इस विरोध में अन्य कर्मचारी संगठनों ने भी समर्थन जताया। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तराखंड के अध्यक्ष अरुण पांडे, खाद्य नागरिक आपूर्ति संघ के महासचिव सुनील देवली, टाउन प्लान संघ के अध्यक्ष शिव प्रकाश नैथानी और रोडवेज कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश पंत भी इस विरोध में शामिल हुए।

संयुक्त मोर्चा ने जिलाधिकारी के खिलाफ की गई फर्जी कार्यवाहियों को वापस लेने और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने की मांग की है। यदि जल्द ही कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी गई है।

Ad