योगनगरी ऋषिकेश में भविष्य के भारी ट्रैफिक को देखते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग ने एक महत्वाकांक्षी बाईपास योजना का खाका तैयार किया है। वर्तमान में इस मार्ग पर प्रतिदिन लगभग 28,937 वाहन चलते हैं, लेकिन अनुमान है कि अगले 20 वर्षों में यह संख्या दोगुनी से भी ज्यादा होकर 72,000 के पार पहुँच जाएगी। इसी बढ़ते दबाव को देखते हुए इस बाईपास को आगामी दशकों की जरूरतों के अनुसार डिजाइन किया जा रहा है। यह प्रोजेक्ट न केवल चारधाम यात्रा के लिए सुगम रास्ता देगा, बल्कि सामरिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा।
भविष्य के ट्रैफिक का अनुमान और योजना
प्रोजेक्ट के अनुसार, साल 2048 तक ऋषिकेश मार्ग पर वाहनों की संख्या 72,672 होने का अनुमान लगाया गया है। एनएच के मुख्य अभियंता मुकेश परमार के अनुसार, सड़क का निर्माण इसी भारी ट्रैफिक लोड को सहने की क्षमता के साथ किया जाएगा। काफी समय से लंबित इस प्रोजेक्ट को अब राष्ट्रीय राजमार्ग एवं परिवहन मंत्रालय ने नए एलाइनमेंट के साथ मंजूरी दे दी है, जिससे इसके निर्माण का रास्ता साफ हो गया है।
निर्माण कार्य और समय सीमा
योजना के पहले चरण में 12 किलोमीटर लंबा फोर-लेन बाईपास बनाया जाएगा। इसका निर्माण कार्य इसी वर्ष शुरू करने की तैयारी है और इसे 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस बाईपास के साथ-साथ एक सर्विस रोड भी बनाई जाएगी ताकि स्थानीय यातायात प्रभावित न हो और मुख्य मार्ग पर तेज गति से वाहनों का संचालन हो सके।
पुलों और अन्य ढांचों का निर्माण
इस 12 किलोमीटर के सफर को सुगम बनाने के लिए कुल 10 पुलों का निर्माण किया जाएगा, जिनमें 6 बड़े और 4 छोटे पुल शामिल होंगे। इसके अलावा, यातायात को बिना रुके चलाने के लिए एक आरओबी (रेलवे ओवरब्रिज) और अन्य आवश्यक स्ट्रक्चर भी बनाए जाएंगे। यह बुनियादी ढांचा न केवल यात्रा का समय कम करेगा बल्कि जाम की समस्या से भी बड़ी राहत दिलाएगा।

