ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात बाधित हो गया है। यह जलमार्ग मध्य-पूर्व के लगभग 10 करोड़ लोगों के लिए जीवनरेखा की तरह है। खाड़ी देशों की भौगोलिक स्थिति और अत्यधिक गर्मी के कारण यहाँ खेती करना बहुत मुश्किल है, जिसके चलते ये देश अपनी जरूरतों के लिए पूरी तरह से आयात पर निर्भर हैं। यदि यह रास्ता लंबे समय तक बंद रहता है, तो इन देशों में भोजन, ईंधन और पीने के पानी की भारी किल्लत हो सकती है।
समुद्र के भरोसे खाड़ी देशों की थाली
खाड़ी देशों की सबसे बड़ी चुनौती यहाँ की गर्म जलवायु है, जहाँ तापमान 50 डिग्री सेल्सियस के पार चला जाता है। खेती योग्य जमीन की कमी के कारण अनाज, मांस, फल और सब्जियों से लदे बड़े जहाज होर्मुज के रास्ते ही इन देशों तक पहुँचते हैं। अगर सप्लाई चेन रुकती है, तो सुपरमार्केट खाली हो जाएंगे और खाद्य सुरक्षा का गंभीर संकट पैदा हो जाएगा।
भोजन के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता
खबर के अनुसार, खाड़ी के अधिकांश देश अपनी भोजन संबंधी जरूरतों के लिए विदेशों पर निर्भर हैं। आंकड़ों के मुताबिक कतर अपनी जरूरत का 98% खाना बाहर से मंगाता है। जबकि यूएई का लगभग 90% खाद्य आयात पर निर्भर है। वहीं सऊदी अरब 80% से ज्यादा भोजन समुद्री रास्तों से आता है तो इराक का 50% से अधिक अनाज के लिए इसी रास्ते पर निर्भर है।
पीने के पानी का गहराता संकट
खाड़ी देशों में नदियों का अभाव है, इसलिए यहाँ विशाल ‘डिसैलिनैशन प्लांट’ (खारे पानी को मीठा बनाने वाले संयंत्र) लगाए गए हैं। इन संयंत्रों को चलाने के लिए जरूरी संसाधनों की सप्लाई रुकने से न केवल भोजन, बल्कि पीने के साफ पानी की भी भारी किल्लत हो सकती है।
अर्थव्यवस्था और सप्लाई चेन पर चोट
इन देशों की अर्थव्यवस्था ‘जस्ट-इन-टाइम’ मॉडल पर काम करती है, जिसका मतलब है कि उनके पास महीनों का अनाज स्टॉक करने की क्षमता कम है। वे ताजा रसद के लिए लगातार आने वाले जहाजों पर निर्भर रहते हैं। मौजूदा संघर्ष के कारण जहाजों को अपना रास्ता बदलना पड़ रहा है, जिससे माल ढुलाई का खर्च और समय दोनों बढ़ रहे हैं।

