घरेलू गैस पर पहरेदारी, यूपीसीएल की क्या होगी तैयारी!

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युद्ध की आग में झुलस रहे खाड़ी देशों का असर धीरे-धीरे पूरी दुनिया समेत उत्तराखंड में भी दिख रहा है. हालांकि सूबे की सरकार जनता को भरोसा दिला रही है कि राज्य के पास घरेलू गैस का भरपूर भंडारण है, लिहाजा न तो घबराने की जरूरत है और न अफवाहों पर गौर करने की जरूरत। हालांकि सूबे के वन मंत्री सुबोध उनियाल ने जलौनी लकड़ी की आपूर्ति की बात भी कही है।
दूसरी ओर आलम ये है कि गैस कंपनियों ने घरेलू सिलेंडर की बुकिंग 25 दिन की कर दी है। जिसका मतलब ये है कि आपको हर महीने सिलेंडर थोड़ा जद्दोजहद के बाद तो मिल ही जाएगा।
लेकिन हर रोज रोटी-पानी और नमक तेल की फिक्र में दुबलाया हुआ आदमी कहां मानता है. लिहाजा सिस्टम से आगे की सोचते हुए अपने स्तर से जुगाड़ करता है। आलम ये है कि गैस नहीं मिलेगी तो इंडक्शन पर खाना पकाने पर फोकस होने लगा है. खबर है कि बाजार में इंडक्शन की बिक्री ने जोर पकड़ लिया है. कहा जाता है कि 2000 वाट का इंडक्शन एक घंटा फुल पॉवर में चलाया जाए तो 2 यूनिट बिजली खर्च करता है। जिसमें दाल,चावल और सब्जी बन सकती हैं।
लेकिन असल सवाल ये है कि ऊर्जा प्रदेश में बिजली का उत्पादन है कितना! ये बात इसलिए कही जा रही है कि गरमियों के सीजन में बिजली की खपत बढ़ जाती है. जंग की बेड़ियों नें गैस आपूर्ति की आजादी पर रोक-टोक बढ़ा दी है. जाहिर है हालात को गंभीरता से लेने वाला तबका इंडक्शन से भी हेल्प मांगेगा लेकिन उत्तराखंड पॉवर कार्पोरेशन उसकी उम्मीदों की कसौटी पर कितना खरा उतरेगा ये तो वक्त ही बताएगा। क्योंकि मौजूदा वक्त में बिजली की मांग 4.2 करोड़ यूनिट तक पहुंच चुकी है जबकि उपलब्ध बिजली 2.3 करोड़ यूनिट की ही बताई जा रही है. ऐसे में गरमियों के सीजन में युद्ध के हालात नीम चढ़े करले जैसे दिखाई दे रहे हैं। लिहाजा यूपीसीएल के माथे पर चिंता की लकीरें उभरने लगी हैं। आम हो या खास सभी दुआएं कर रहे हैं ईरान- इजराइल युद्ध जल्दी खत्म हो वरना गैस,तेल और बिजली किल्लत जिंदगी को दोजख बना कर रख देगी।
बहरहाल बड़ा सवाल ये भी है कि जिस राज्य में गंगा यमुना अलकनंदा मंदाकिनी जैसी तमाम छोटी बड़ी नदियां हों और कई पॉवर प्रोजेक्ट के साथ साथ सोलर सिस्टम बिजली उत्पादन कर रहे हों वहां बिजली का उत्पादन खपत के मुताबिक क्यों नहीं