उत्तराखंड भारत का वह पहला राज्य बन चुका है जिसने समान नागरिक संहिता, अल्पसंख्यक शिक्षा कानून, लैंड जिहाद और लव जिहाद जैसे समानता और सुशासन के चार स्तंभ स्थापित किए हैं। यही कारण भी है कि भारतीय आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक चेतना से गहरे जुड़ाव रखने वाला उत्तराखंड राज्य ने इन स्तंभों को स्थापित कर पूरे देश में एक विशेष पहचान बनाई है। जहां एक ओर समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी कानून के गठन, व्यवस्था और समयबद्ध क्रियान्वयन के मोर्चे पर उत्तराखंड रोल मॉडल बनकर उभरा तो वहीं, अल्पसंख्यक शिक्षा कानून को लागू कर प्रदेश ने ऐसी विशिष्ट पहल की है, जिसने अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थाओं को लेकर प्रचलित व्यवस्था को नए सिरे से परिभाषित किया है।
उत्तराखंड द्वारा दोनों ही कानूनों को बनाकर उनके सकुशल क्रियान्वयन को देखते हुए अब केंद्रीय भाजपा सरकार यह सोच रही है कि इस प्रकार का प्रयोग पूरे देश में सकुशली कैसै किया जाए, चूंकि उत्तराखंड में अगले साल विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं लिहाजा ऐसे में भाजपा के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की नजरें भी उत्तराखंड पर टिकी हैं। क्योंकि आगामी समय में इन कानूनों को जनमत की कसौटी पर भी परखा जाएगा।
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने की UCC की प्रशंसा
समान नागरिक संहिता (UCC) की स्वप्नगंगा उत्तराखंड से निकलकर अब पूरे देश को सरसब्ज करेगी, ऐसी उम्मीदें मजबूत हो गई हैं। मुंबई में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष की दो दिवसीय व्याख्यानमाला के आखिरी दिन रविवार को सरसंघचालक मोहन भागवत ने उत्तराखंड के UCC को देश की एकता के लिए सराहनीय बताया। उन्होंने पूरे देश में UCC लागू करने के लिए व्यापक जनसमर्थन जुटाने का तरीका भी उत्तराखंड का उदाहरण देकर समझाया। यहां हिंदुत्व की भावभूमि पर काम हुआ, लेकिन सभी पंथों, समुदायों और वर्गों को बराबर प्रतिनिधित्व दिया गया। पिछले पांच सालों में पुष्कर सिंह धामी सरकार ने कानूनी समानता का कवच प्रदान करने के लिए उर्वर कदम उठाए। UCC के अलावा अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम बनाया गया, जिसमें मुस्लिम के साथ सिख, जैन, बौद्ध, ईसाई और पारसी समुदायों के संस्थान शामिल हैं।
1 जुलाई 2026 से मदरसा बोर्ड खत्म हो जाएगा और 11 सदस्यीय अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण क्रियान्वयन करेगा। धामी सरकार ने लैंड जिहाद, लव जिहाद पर सख्त कानून बनाए और लागू किए। धार्मिक प्रतीकों से सरकारी जमीन पर अतिक्रमण रोका गया। हल्द्वानी बनभूलपुरा दंगे के बाद दंगाइयों को कड़े संदेश दिए। मतांतरण की सजाएं कठोर की गईं और आपरेशन कालनेमि से सनातन संस्कृति की रक्षा हो रही है। भाजपा ने चुनावी वादों को धरातल पर उतारा है। उत्तराखंड UCC मॉडल, धामी सरकार के कानून और RSS की तारीफ से प्रदेश की पहल देशव्यापी मिसाल बनेगी। जनता का असली रिएक्शन जल्द सामने आएगा, जो भाजपा के लिए बड़ा टेस्ट होगा।


