उत्तराखंड सांसद निधि विवाद: ग्रामीण क्षेत्र बुनियादी सुविधाओं से महरूम, सांसद निधि दूसरे राज्यों में खर्च

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उत्तराखंड एक पर्वतीय राज्य है जिसके कुल भू-भाग का 45.44% हिस्सा तो वनाच्छादित ही है। उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां हमेशा से विकास के मार्ग पर बड़ी चुनौती बनकर आड़े आई है, यही कारण भी है कि वर्तमान समय उत्तराखंड के कई गांव आज भी पानी, सड़क और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं। एक ओर जहां उत्तराखंड के कई ग्रामीण क्षेत्र बुनियादी असुविधाओं की त्रासदी से ग्रस्त हैं तो वहीं हाल में जारी हुई खबर से मालूम पड़ा है कि प्रदेश की सांसद निधि जो प्रदेश हित के लिए उपयोग की जानी चाहिए थी उसका उपयोग अन्य राज्यों के लिए किया जा रहा है। दरअसल, हाल में सूचना के अधिकार के तहत मिले दस्तावेजों में खुलासा हुआ है कि राज्य के सांसदों ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों में सांसद निधि खर्च की है। दस्तावेजों की मानें तो प्रदेश के सांसदों ने दूसरे राज्यों में ट्यूबवेल, स्कूल, सामुदायिक भवन और जल निकासी जैसे कार्यों के लिए करीब 1 करोड़ 28 लाख रुपये आवंटित किए।

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सांसद निधि दूसरे राज्यों में खर्च


इस कड़ी में टिहरी सांसद माला राज लक्ष्मी शाह का नाम भी सम्मिलित है जिन्होंने वित्तीय वर्ष 2024-25 में उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के लिए एक करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की, तो वहीं इस दौड़ में राज्यसभा सांसद नरेश बंसल भी पीछे नहीं हैं सांसद बंसल ने हरियाणा में 25 लाख रुपये खर्च किए, जबकि पूर्व राज्यसभा सांसद तरुण विजय के कार्यकाल में स्वीकृत तीन लाख रुपये की राशि उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के लिए जारी की गई।


वहीं इस पूरे प्रकरण को लेकर सत्ताधारी दल भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से नकारा है, भाजपा प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार ने कहा कि सांसद अपनी सांसद निधि का अधिकांश खर्च अपने ही संसदीय क्षेत्र में करते हैं। उन्होंने कहा कि कई बार उत्तराखंड के लोग राज्य से बाहर भी बसे होते हैं और उनकी भावनाओं व जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सीमित मात्रा में कुछ धनराशि बाहर के क्षेत्रों में दी जाती है। कुंदन परिहार ने साफ किया कि इसके अलावा मुख्यत: सांसद निधि का पूरा फोकस अपने संसदीय क्षेत्र के विकास पर ही रहता है।

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विपक्ष ने किया भाजपा का घेराव


जबकि विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मुद्दे पर अपना कड़ा विरोध जताया है, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल का कहना है कि जब उत्तराखंड के पहाड़ी और सीमांत इलाकों के गांव आज भी पीने के पानी, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं, ऐसे में सांसद निधि का बड़ा हिस्सा दूसरे राज्यों में खर्च किया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने राज्य की वास्तविक जरूरतों को नजरअंदाज किया है और सांसद निधि का इस्तेमाल राजनीतिक प्राथमिकताओं के आधार पर किया जा रहा है।

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कांग्रेस का यह भी कहना है कि सांसद निधि का पहला अधिकार उत्तराखंड की जनता का है और जब तक राज्य के गांव आत्मनिर्भर नहीं होते, तब तक बाहर खर्च की गई राशि पर सवाल उठते रहेंगे। एक तरफ भाजपा इसे नियमों के तहत लिया गया फैसला बता रही है, तो वहीं कांग्रेस इसे उत्तराखंड के साथ अन्याय करार दे रही है। ऐसे में सांसद निधि को लेकर उठे ये सवाल अब सियासी बहस को और तेज करते नजर आ रहे हैं।