देहरादून। खरमास की समाप्ति के साथ ही उत्तरायण का सूरज निकलने को है और इसी के साथ उत्तराखंड की सियासत में भी नई हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि उत्तरायण का यह सूरज केवल मौसम में बदलाव का संकेत नहीं देगा, बल्कि कई विधायकों की किस्मत भी चमकाने वाला साबित हो सकता है। लंबे समय से लंबित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अब संकेत मिल रहे हैं कि जल्द ही तस्वीर साफ हो सकती है।
सूत्रों के मुताबिक उत्तराखंड में फिलहाल मंत्रिमंडल के पांच पद रिक्त हैं, जिन पर विधायकों को जिम्मेदारी दी जानी है। इन पदों को लेकर सत्तारूढ़ दल के भीतर काफी समय से मंथन चल रहा था। कई विधायक लंबे समय से मंत्री पद की आस लगाए बैठे हैं, वहीं क्षेत्रीय और जातीय संतुलन को लेकर भी पार्टी स्तर पर समीकरण साधने की कोशिशें जारी हैं। ऐसे में उत्तरायण के बाद यह माना जा रहा है कि सरकार इन रिक्त पदों को भरकर संगठन और सरकार दोनों को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठा सकती है।
राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि इस बार उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में एक साथ बदलाव देखने को मिल सकता है। दोनों राज्यों में सत्तारूढ़ पार्टी के स्तर पर समन्वय बनाकर फैसले लिए जा रहे हैं, ताकि संगठनात्मक संदेश एक जैसा जाए। यही वजह है कि मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर दोनों राज्यों की गतिविधियों पर राजनीतिक पंडितों की नजरें टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि यदि उत्तर प्रदेश में कोई बड़ा निर्णय होता है, तो उसका असर उत्तराखंड की राजनीति पर भी साफ तौर पर दिखाई देगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर पहले ही कई बार पार्टी हाईकमान से मुलाकात कर चुके हैं। दिल्ली दौरों के दौरान उन्होंने न सिर्फ संभावित नामों पर चर्चा की, बल्कि सरकार के कामकाज, आगामी राजनीतिक चुनौतियों और संगठनात्मक संतुलन को लेकर भी फीडबैक दिया है। सूत्र बताते हैं कि मुख्यमंत्री की इन बैठकों के बाद केंद्र स्तर पर सकारात्मक संकेत मिले हैं और अब औपचारिक घोषणा मात्र बाकी है।
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि केंद्र से हरी झंडी मिलने के बाद आने वाले 48 घंटों में राज्य को कैबिनेट विस्तार का “तोहफा” मिल सकता है। यदि ऐसा होता है तो यह न केवल सरकार के लिए राहत की खबर होगी, बल्कि उन विधायकों के लिए भी बड़ी सौगात साबित होगी जो लंबे समय से जिम्मेदारी मिलने का इंतजार कर रहे हैं। वहीं, मंत्रिमंडल विस्तार से सरकार आगामी सत्र और राजनीतिक गतिविधियों के लिए खुद को और मजबूत स्थिति में ला सकती है।
हालांकि, अभी तक आधिकारिक तौर पर किसी भी नाम या तारीख की पुष्टि नहीं की गई है। लेकिन जिस तरह से राजनीतिक गतिविधियां तेज हुई हैं, उससे साफ है कि फैसला अब ज्यादा दूर नहीं है। उत्तरायण के सूरज के साथ ही उत्तराखंड की राजनीति में भी नई सुबह होने की उम्मीद जताई जा रही है। अब देखना यह होगा कि मंत्रिमंडल में किन चेहरों को जगह मिलती है और यह विस्तार राज्य की राजनीति को किस दिशा में ले जाता है।


