उत्तराखंड के दूरस्थ और सीमांत क्षेत्रों में खेती करने वाले किसानों के लिए एक बड़ी खुशखबरी आई है। अब सीमांत काश्तकारों को अपनी मेहनत से उगाई गई फल और सब्जियों को बेचने के लिए दूर-दराज की मंडियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। उत्तराखंड के कृषि और उद्यान विभाग ने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत किसान अब सीधे अपनी उपज आईटीबीपी को सप्लाई कर सकेंगे। इस कदम से न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि उन्हें बिचौलियों और परिवहन की समस्याओं से भी राहत मिलेगी।
इन 5 जिलों के किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
कृषि मंत्री गणेश जोशी के अनुसार, यह योजना विशेष रूप से राज्य के उन सीमांत जिलों के लिए तैयार की गई है जहाँ से मंडी तक पहुँचना मुश्किल होता है। इसमें उत्तरकाशी, चमोली, पिथौरागढ़, बागेश्वर और चंपावत के दूरस्थ क्षेत्रों में बागवानी कर रहे किसानों को शामिल किया गया है। इन जिलों के किसान अब सीधे आईटीबीपी के कैंपों तक ताजी सब्जियां और फल पहुँचा सकेंगे।
मंडी पर निर्भरता होगी खत्म
अब तक इन दुर्गम क्षेत्रों के किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए लंबी दूरी तय कर मंडी जाना पड़ता था, जहाँ अक्सर उन्हें सही दाम नहीं मिल पाता था। इस नए समझौते के बाद, किसानों के पास एक पक्का और बड़ा खरीदार (ITBP) उपलब्ध होगा। इससे न केवल जवानों को ताजी और स्थानीय सब्जियां मिलेंगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

