उत्तराखंड कांग्रेस में अपनी अपनी ढपली अपना अपना राग अलापना बंद नहीं हुआ है। कांग्रेस प्रदेश सह प्रभारी बेशक बयानबाजी को अनुशासनहीनता करार दे रहे हों ,लेकिन नेता जी हैं कि, थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। पूर्व विधान सभा अध्यक्ष गोविंद कुंजवाल अब भी वफादारी का गुलाल उडाते दिख रहे हैं। कुंजवाल ने फिर दोहराया है उत्तराखंड में हरीश रावत का कोई विकल्प नहीं है। रावत ने पार्टी को खून-पसीने से सींचा है। लिहाजा उनके साथ आज जो बर्ताव किया जा रहा है उसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कुंजवाल ने हरीश रावत के संघर्ष का हवाला देते हुए कहा कि 2002 में हरीश रावत ने उत्तराखंड में कांग्रेस की सरकार बनाने के लिए दिन रात मेहनत की थी लेकिन मुख्यमंत्री एन.डी. तिवारी को बना दिया गया। फिर 2012 में रावत ने कांग्रेस की सरकार बनाने के लिए मेहनत की लेकिन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा को बनाया गया। हरीश रावत ने हर बार संयम बरता और वफादारी निभाई। कोई होता तो पार्टी छोड़ चुका होता। कुंजवाल ने हरीश रावत की तरफदारी करते हुए कहा हरीश रावत जमीनी नेता है और आज सबसे ज्यादा लोग हरीश रावत के साथ जुडे हुए हैं।
कुंजवाल ने नाम तो नहीं लिया लेकिन अपनी भावना व्यक्त करते हुए कहा कि आज जो नेता बड़े बड़े बयान दे रहे हैं उन्होंने सत्ता के लिए क्या कुछ नहीं किया सबको पता है। बहरहाल गोविंद सिंह कुंजवाल ने कहा कि पार्टी प्रदेश अध्यक्ष को अब आगे आना चाहिए और आलाकमान से बातचीत कर विवाद को सुलझाना चाहिए । इसका मतलब कांग्रेस में विवाद तो है ना !

