उत्तराखंड में गुलदारों का आतंक: जंगलों में क्षमता से 4 गुना ज्यादा हुई आबादी, बढ़ रहा खतरा

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एक ताजा शोध में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि उत्तराखंड के जंगल अब गुलदारों (Leopards) के लिए छोटे पड़ने लगे हैं। प्रदेश के जंगलों की धारण क्षमता (Carrying Capacity) जहाँ केवल 500 गुलदारों की है, वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर 2,275 तक पहुँच गई है। इस असंतुलन के कारण गुलदार भोजन और शिकार की तलाश में रिहायशी इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे इंसानों और जानवरों के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। रूस की वैज्ञानिक पत्रिका ‘बायोलॉजी बुलेटिन’ में प्रकाशित यह शोध बताता है कि करीब 1775 गुलदार वर्तमान में जंगलों की सीमा से बाहर घूम रहे हैं, जो सीधे तौर पर इंसानी जीवन के लिए खतरा है।

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टिहरी और पौड़ी में सबसे ज्यादा असर

सर्वे के अनुसार, उत्तराखंड के टिहरी और पौड़ी जिले गुलदार के हमलों से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। पौड़ी में स्थिति बेहद गंभीर है, जहाँ अकेले वर्ष 2025 में ही 15 से अधिक लोगों को गुलदार ने अपना शिकार बनाया है। वहीं, पिछले 5 वर्षों में यहाँ 27 लोग अपनी जान गँवा चुके हैं। टिहरी में भी हर साल औसतन तीन लोगों की मौत हो रही है और दर्जनों घायल हो रहे हैं।

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खाली होते गाँव और फैलती झाड़ियाँ

शोध में एक और महत्वपूर्ण कारण ‘पलायन’ को माना गया है। प्रदेश के करीब 3,940 गाँव खाली हो चुके हैं, जिससे खेत अब बंजर होकर जंगली झाड़ियों (जैसे लैंटाना घास) में बदल गए हैं। इन घनी झाड़ियों में गुलदार आसानी से छिप जाते हैं और ग्रामीणों पर अचानक हमला कर देते हैं। गाँवों का खाली होना और विदेशी वनस्पतियों का फैलना गुलदारों को आबादी के करीब आने के लिए सुरक्षित गलियारा दे रहा है।

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शोध के मुख्य आंकड़े

क्षमता बनाम संख्या: 500 की जगह 2,275 गुलदार मौजूद।

शिकार का क्षेत्र: एक गुलदार को 30 से 50 वर्ग किमी क्षेत्र चाहिए, लेकिन आबादी बढ़ने से जगह कम पड़ गई है।

बढ़ती मौतें: पूरे प्रदेश में गुलदार के हमलों में 2023 में 21, 2024 में 16 और 2025 में 18 लोगों की जान गई है।

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