उत्तराखंड में पिछले कुछ समय से चल रही डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ की हड़ताल मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ हुई सकारात्मक वार्ता के बाद समाप्त हो गई है। मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित इस बैठक में सीएम ने इंजीनियरों की मांगों को ध्यानपूर्वक सुना और उनके उचित समाधान का आश्वासन दिया। सरकार के इस रुख के बाद महासंघ ने अपनी हड़ताल को स्थगित करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि जनहित के कार्यों में किसी भी तरह की बाधा नहीं आनी चाहिए और विकास कार्यों को सुचारू रूप से चलाना सबकी जिम्मेदारी है।
समाधान के लिए ‘सब-कमेटी’ का होगा गठन
इंजीनियरों की विभिन्न मांगों के तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं की जांच के लिए मुख्यमंत्री ने एक सब-कमेटी (उप-समिति) बनाने का निर्देश दिया है। यह कमेटी महासंघ द्वारा उठाए गए सभी बिंदुओं का बारीकी से परीक्षण करेगी और जल्द ही अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। सीएम ने आश्वासन दिया कि सरकार इन मांगों पर सकारात्मक दृष्टिकोण रख रही है और प्राथमिकता के आधार पर इनका निस्तारण किया जाएगा।
बैठक में उठाई गई 27 प्रमुख मांगें
डिप्लोमा इंजीनियर्स ने बैठक के दौरान अपनी 27 सूत्रीय मांगों को प्रमुखता से रखा। इसमें सबसे मुख्य मुद्दा वेतन विसंगति और पदोन्नति का था। इंजीनियरों का कहना है कि साल 2017 से पहले 10 वर्ष की सेवा पर ₹5400 का ग्रेड पे मिलता था, जो अब 13 वर्ष बाद मिल रहा है। इसके अलावा पुरानी पेंशन योजना की बहाली, समय पर पदोन्नति और वेतनमान से जुड़े अन्य लंबित मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
संवाद से समाधान के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार “संवाद और समन्वय” के जरिए हर समस्या का हल निकालने के लिए प्रतिबद्ध है। बैठक में प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, शैलेश बगौली समेत शासन के कई वरिष्ठ अधिकारी और महासंघ के अध्यक्ष आर.सी. शर्मा व महासचिव वीरेंद्र सिंह गुसाईं भी मौजूद रहे। सभी पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि राज्य के विकास के लिए इंजीनियरों और प्रशासन का साथ मिलकर काम करना अनिवार्य है।

