…तो जल्द बायोगैस से दौड़ेगी गाडियां !

ख़बर शेयर करें

जी हां, ये गुड न्यूज भविष्य के लिए बड़ी उम्मीद है कि बहुत जल्द आपकी गाड़ी बॉयोगैस से सड़कों पर दौड़ेगी। आपको यकीन हो न हो लेकिन गैस ऑथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड यानि GAIL को गोबर की ताकत पर पूरा भरोंसा हो गया है। इसके लिए गेल ने उत्तरप्रदेश के सहारनपुर स्थित कंप्रेस्ड बॉयोगैस (CBG)प्लांट से करार किया है। यानि बायोगैस सीएनजी की तरह इस्तमाल की जाएगी।

इस करार के तहत गैल शुरुआत में CBG प्लांट सहारनपुर से पांच टन गैस खरीदेगा. जिसे देहरादून के विकासनगर इलाके के तीन सीएनजी पंप से प्रारंभिक प्रयोग किया जाएगा। हालांकि शुरूआत मे एक टन CBG का इस्तेमाल किया जाएगा । इसके बाद धीरे-धीरे इसकी आपूर्ति बढ़ाई जाएगी।

इतना ही नहीं सब कुछ नतीजो के हिसाब से सही रहा तो आने वाले वक्त में CBG का सस्ते ईधन के तौर पर भरपूर इस्तमाल भी होगा और मुल्क को गैस के लिए गैस उत्पादक विदेशी देशो पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इससे कई फायदे होंगे। जहां हमारा विदेशी मुद्रा भंडार बढेगा, वहीं पशुधन में भी इजाफा होगा और किसान की आमदनी बढ़ेगी तो ग्रामीण भारत फिर से समृद्ध और खुशहाल होगा।

यह भी पढ़ें -  देहरादून में आबकारी निरीक्षक प्रेरणा बिष्ट ने की बड़ी कार्रवाई, अवैध शराब के साथ आरोपी गिरफ्तार......

ईरान और इजराइल की जंग के बीच देखा गया है कि भारत मे एलपीजी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। हालात सामान्य कब तक होंगे कहा नहीं जा सकता लेकिन इस जंग के दौरान पीएनजी और सीएनजी की आपूर्ति पर उतना फर्क नहीं पड़ा। लेकिन गेल की सोच है कि अगर कभी पीएनजी और सीएनजी की आपूर्ति पर भी संकट मंडराया तो क्या होगा। ऐसे में माना जा रहा है कि गेल अब CBG पर फोकस करेगा और एक बड़ा कदम उठाएगा।

यह भी पढ़ें -  उत्तराखंड में शिक्षा विभाग का ऐतिहासिक कदम; सत्र शुरू होते ही 23 लाख छात्रों को मिलीं मुफ्त किताबें

दरअसल सामान्य बॉयोगैस को और रिफाइन किया जाएगा। इसमें पाए जाने वाली कॉर्बन डॉई ऑक्साइड और हाइड्रोजन सल्फाइड को निकाला जाएगा. जिससे बॉयोगैस में 90 फीसद से ज्यादा मीथेन रह जाएगी और ये पूरी तरह से कॉमर्शियल सीएनजी की तरह काम करेगी। यानि फिर CBG से वाहन भी सरपट दौड़ेगे।

इतना ही नहीं इसका उत्पादन बढेगा तो कई फायेदे होंगे। मसलन पर्यायवरण की हेल्थ सुधरेगी। क्योंकि CBG पेट्रोल और डीजल के मुकाबले हमारी आबोहवा को कम नुकसान पहुंचाएगी। वहीं गैस निकलने के बाद जो गोबर का अपशिष्ट बचेगा वो जैविक खाद के तौर पर इस्तेमाल होगा।इससे खेती किसानी को भी फायदा पहुंचेगा और उम्मीद है कि जिस उर्वरक के लिए आजकल अन्नदाता परेशान हैं तब नहीं होगा जब गोबर गैस को व्यवसायिक तौर पर CBG के रूप में इस्तमाल किया जाएगा और इसका उत्पादन बढ़ जाएगा।

यह भी पढ़ें -  चारधाम यात्रा 2026: सीएम धामी का सख्त सुरक्षा प्लान, कोई पैसेंजर लिमिट नहीं

वहीं किसान भी इसका प्लांट लगाकर अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं जबकि शहर गांवों के लिए CBG वरदान साबित हो सकती है। क्योंकि इसके बड़े पैमाने पर उत्पादन होने से कचरा निस्तारण की समस्या में भी कमी आने की संभावना है। उम्मीद है कि गेल की योजना साकार होगी और हमारे देश प्रदेश का पशुधन मजबूत होगा और किसान के चेहरे पर खुशहाली की चमक बिखरेगी।

ADVERTISEMENTS