जनाब ये कैसी चौकसी है? गरीबों की बस्ती में स्मैक का धंधा !

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देहरादून के डोईवाला को करीब से जानने वाले तबके और डोईवाला के पुराने बाशिंदों के लिए डोईवाला की केशवपुरी बस्ती अबूझ पहले से कम नहीं। सौंग नदी के किनारों को निगल चुकी ये बस्ती अपने कारनामों की वजह से हर रोज सुर्खियों में रहती है। केशव बस्ती में पसरी गरीबी के माहौल में हर रात होने वाला झगड़ा- फसाद कोढ़ में खाज जैसा है। लिहाजा डोईवाला का सरकारी अस्पताल का इमरजेंसी वार्ड हो या फिर डोईवाला पुलिस इस बस्ती की कारगुजारियों से आए दिन हलकान रहती है। शायद ही कोई दिन ऐसा हो जब केशव बस्ती का कोई केस कोतवाली में न आए या इमरजेंसी वार्ड में तैनात मुलाजिमो की परेशानी न बढ़ाए. इतना ही नहीं इस बस्ती में अब नशे का अवैध धंधा भी फलने-फूलने लगा है। डोईवाला पुलिस ने केशवबस्ती से चौकिंग के दौरान साढे पांच लाख की स्मैक जब्त की । 18.37 ग्राम स्मैक एक महिला से बरामद की गई ।

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हालांकि पुलिस ने महिला को गिरफ्तार कर कोर्ट में भी पेश भी किया। लेकिन सवाल ये है कि आखिर स्मैक जैसा महंगा नशा,मामूली सी केशव बस्ती में कैसे पहुंचा। कितनी अजीब बात है उत्तराखंड सरकार आए दिन नशे के खिलाफ जनता को जागरूक कर रही है। बावजूद इसके, नशे के सौदागर अपने मंसूबों को लगातार अंजाम दिए जा रहे हैं। महिला से बरमाद जहरीले नशे की पुड़िया साबित कर रही है कि सौदागरों के लिए गरीब महिलाएं सॉफ्ट टारगेट बन गई हैं जिन्हें वे आसनी से अपने जाल में फंसाने में कामयाब हो रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर वो कौन सी कमजोर कड़ी है जिसकी नापाक हरकत की वजह से राज्य सरकार के दामन पर नशे का दाग लग रहा है। और खाकी की शान पर बट्टा लग रहा है। लिहाजा जरूरत है इस बस्ती को सिरे से खंगालने की और नकेल कसने की ताकि गरीबों के गलियारे में जुर्म के सांप अपना जहर न उगल पाएं।

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इतना ही नहीं खाकी को और सख्ती बरतनी होगी ताकि देवभूमि उत्तराखंड महंगे नशे के कारोबार से महफूज रहे. और यहां की जवानी भी होश मे रहे। सवाल ये भी है कि, अगर खाकी चौकस है तो ये कैसी चौकीदारी है कि, स्मैक जैसे महंगे नशे का कारोबार सूबे की सरहदों के भीतर गरीबों की बस्ती में फलफूल रहा है।