2027 के विधानसभा चुनाव के लिए धामी सरकार ने अपनी कस ली है। कहीं कोई कोर कसर बाकी न रहे इस पर पूऱा फोकस किया जा रहा है। चार साल के अपने शासन में धामी ने सूबे की नब्ज पर जो हाथ रखा तो समझ लिया कि इस राज्य के नौजवानों को रोजगार की दरकार है जबकि खूबसूरत पहाड़ों को अस्पताल ,डॉक्टर सड़क और तालीम के बेहतर ठिकानों की। लिहाजा धामी सरकार ने अपना रोड मैप तैयार कर लिया है ताकि चुनाव के दौरान जनता के दरवाजे पर बेधड़क जीत का आशीर्वाद मिल सके। इसके लिए जहां अब तक के चार साल के कार्यकाल में तकरीबन 30 हजार से ज्यादा बेरोजगारों को सरकारी रोजगार मुहैय्या करवाई गई है वहीं इस सिलसिले को आगे भी बढ़ाया जा रहा है।
इसके लिए सभी विभागो को रिक्त पदों की सूची तैयार कर उन पर भरती प्रक्रिया के निर्देश दिए जा चुके हैं। माना जा रहा है कि चुनाव से पहले धामी सरकार सूबे के बेरोजगारों को नौकरी का बड़ा तोहफा दे कर बाजी मार सकती है। वहीं ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के दौरान हुए एएमयू को भी अमलीजामा पहनाय़ा जाएगा। हालांकि साढ़े तीन लाख करोड़ के एमओयू मे से तकरीबन डेढ लाख करोड़ के प्रोजेक्ट पर काम भी शुरू हो चुका है।और मुमकिन है कि चुनाव मैदान में उतरने से पहले नए औद्योगिक पार्क बेरोजगारों के लिए रोजगार का साधन बन जाएं। सरकारी और फैक्ट्री वाले रोजगार से इतर भी धामी रोडमैप पर नजर डाली जाए तो दिखाई देगा कि राज्य के विकास के लिए जिस बुनियादी ढांचे को विकसित करने की बुनियाद डाली गई है वो भी चुनावी घड़ी में अपना सिर उठा दे। मसलन दिल्ली देहरादून एक्सप्रेस वे, ऋषिकेश –कर्णप्रयाग रेल लाइन, या फिर मसूरी और केदारनाथ समेंत दूसरे स्थानो के रोपवे।
वहीं उत्तराखंड स्वस्थ रहे इसके लिए राज्य के पहाड़ी इलाकों की हेल्थ सुधारनी जरूरी है। लिहाजा धामी सरकार इसके लिए जहां पहाड़ों में खेती-बागवानी पर फोकस कर रही है, वहीं नए मेडिकल कॉलेज के साथ साथ पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेज और किच्छा में निर्माणाधीन एम्स को समय से पूरा करना चाह रही है ताकि पहाड़ से मैदान तक का रिपोर्टकार्ड चुनावी घड़ी में जनता के सामने रखा जा सके। और धामी के चुनावी योद्धा बेफिक्री से कह सके तीसरी बार धामी सरकार

