रैगिंग या उत्पीड़न…? समुदाय विशेष के छात्र से मारपीट की शिकायत, दून मेडिकल कॉलेज प्रशासन की चौपट व्यवस्था से कठघरे में सिस्टम….

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देहरादून |
प्रदेश का सबसे बड़ा और प्रतिष्ठित सरकारी चिकित्सा संस्थान दून मेडिकल कॉलेज एक बार फिर गंभीर विवादों में घिरता नजर आ रहा है। ताजा मामला रैगिंग और कथित शारीरिक उत्पीड़न से जुड़ा हुआ है, जिसने न केवल कॉलेज प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि मेडिकल परिसरों में छात्रों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा कर दी है।
मामला एक जूनियर छात्र से जुड़ा बताया जा रहा है, जो एक विशेष समुदाय से संबंध रखता है। आरोप है कि कॉलेज के दो सीनियर छात्र जिसमें एक समुदाय विशेष से है के द्वारा 12 जनवरी को जूनियर छात्र के साथ बेरहमी से मारपीट की गई। पीड़ित छात्र का कहना है कि सीनियर ने पहले उसे जबरन बाल कटवाने के लिए मजबूर किया और इसके बाद बेल्ट व चप्पलों से उसकी पिटाई की गई। इस घटना के बाद से छात्र गहरे सदमे में है और मानसिक रूप से भी भयभीत बताया जा रहा है।
पीड़ित छात्र ने पूरे घटनाक्रम को लेकर कॉलेज प्रशासन को लिखित शिकायत सौंपी है, जिसमें उसने विस्तार से बताया कि किस तरह उसे परिसर के बाहर ले जाकर प्रताड़ित किया गया। छात्र का कहना है कि यह महज रैगिंग नहीं बल्कि एक सोची-समझी हिंसक कार्रवाई थी, जिससे उसकी गरिमा और सुरक्षा दोनों को ठेस पहुंची है।
मामले के सामने आने के बाद कॉलेज प्रशासन ने औपचारिक तौर पर जांच शुरू करने की बात कही है। हालांकि, जांच की गति और उसकी निष्पक्षता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। कॉलेज परिसर और छात्र समुदाय में यह चर्चा आम है कि पीड़ित छात्र एक विशेष समुदाय से आता है, इसलिए प्रशासन इस मामले में चुप्पी साधे हुए है और कठोर कदम उठाने से बच रहा है। छात्रों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि इसी तरह का मामला किसी अन्य समुदाय से जुड़े छात्र के साथ हुआ होता, तो अब तक कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा चुकी होती। ऐसे में यह आरोप भी लग रहे हैं कि मामले को दबाने या लंबा खींचने के लिए सिर्फ “जांच-जांच” का खेल खेला जा रहा है, ताकि शिकायतकर्ता पर मानसिक दबाव बनाया जा सके।
यह पहला मौका नहीं है जब दून मेडिकल कॉलेज की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हों। इससे पहले भी रैगिंग, अव्यवस्था और छात्र सुरक्षा से जुड़े मामलों में कॉलेज प्रशासन की भूमिका को लेकर सवाल खड़े होते रहे हैं। बावजूद इसके, हर बार जांच का भरोसा देकर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि मेडिकल जैसे संवेदनशील संस्थानों में यदि इस तरह की घटनाएं होती हैं और समय रहते कठोर कार्रवाई नहीं होती, तो इसका सीधा असर छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और संस्थान की साख पर पड़ता है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या दून मेडिकल कॉलेज प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करेगा, या फिर यह मामला भी अन्य विवादों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा। फिलहाल, पूरे प्रदेश की नजरें कॉलेज प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई