देहरादून में त्योहारों के बीच खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यवाही उस समय चर्चा का विषय बन गई जब पटेल नगर स्थित एक मकान में नकली मावा बनाए जाने की सूचना पर छापा मारने पहुंची टीम को अप्रत्याशित स्थिति का सामना करना पड़ा। मिली जानकारी के अनुसार त्योहारों के मद्देनजर मिलावटी खाद्य पदार्थों की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। इसी क्रम में खाद्य सुरक्षा विभाग को सूचना मिली कि पटेल नगर क्षेत्र में एक घर के भीतर बड़े पैमाने पर नकली मावा तैयार किया जा रहा है। सूचना के आधार पर उप आयुक्त आरएस रावत के नेतृत्व में टीम ने मौके पर दबिश दी।
सूत्रों द्वारा बताया जा रहा है कि जैसे ही टीम घर के अंदर पहुंची, वहां मौजूद एक महिला ने टीम को देखकर अपने कपड़े फाड़ लिए, जिससे मौके पर अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। इस घटनाक्रम से पूरी टीम असहज हो गई और कुछ समय के लिए कार्रवाई प्रभावित हुई। हालांकि अधिकारियों ने स्थिति को संभालते हुए जांच प्रक्रिया आगे बढ़ाई। इस घटना के बाद विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। चर्चा का केंद्र यह है कि जब टीम किसी आवासीय परिसर में दबिश देने जा रही थी तो उसके साथ महिला अधिकारी या महिला पुलिस कर्मी क्यों नहीं थीं। ऐसे मामलों में महिला सदस्य की मौजूदगी आवश्यक मानी जाती है, ताकि किसी भी अप्रिय या संवेदनशील स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
त्योहारों के दौरान खाद्य सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है, क्योंकि बाजार में मावा, मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने के साथ मिलावट की आशंका भी अधिक रहती है। जानकारों का कहना है कि यदि सघन चेकिंग अभियान केवल त्योहारों तक सीमित न रहकर नियमित रूप से चलाया जाए तो मिलावटखोरों पर पहले ही अंकुश लगाया जा सकता है।
फिलहाल विभाग की ओर से जब्त सामग्री के सैंपल जांच के लिए भेजे जाने की तैयारी की जा रही है। मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है। वहीं, इस पूरी घटना ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि छापेमारी जैसी संवेदनशील कार्रवाई के दौरान टीम गठन में आवश्यक सावधानियां बरतना कितना जरूरी है।


