उत्तराखंड सरकार अपने चार साल पूरे करने के बाद अब चुनावी वर्ष की तैयारियों में जुट गई है। शासन में विकास कार्यों में तेजी लाने के लिए नौकरशाही के स्तर पर एक बड़े फेरबदल की कवायद तेज हो गई है। कार्मिक विभाग उन अधिकारियों की सूची तैयार कर रहा है जो फाइलों को लटकाने या बजट जारी करने में देरी करते हैं। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य जनता से जुड़े विभागों को अधिक सक्रिय बनाना है ताकि चुनाव से पहले विकास योजनाओं का लाभ धरातल पर पहुंच सके। इस फेरबदल के तहत शासन के सचिवों से लेकर जिलों के जिलाधिकारी (DM) और नगर आयुक्तों के तबादले किए जाने की पूरी संभावना है।
फाइलें अटकाने वाले अफसरों पर होगी कार्रवाई
शासन अब उन अधिकारियों पर सख्त रुख अपनाने जा रहा है जो केंद्र से बजट मिलने के बाद भी उसे राज्य के विभागों को जारी करने में महीनों की देरी करते हैं। कार्मिक विभाग ऐसे अफसरों की विशेष ‘कुंडली’ खंगाल रहा है। ऐसे अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों से हटाकर उन पर जवाबदेही तय की जाएगी, ताकि शासन के कामकाज में पारदर्शिता और गति बनी रहे।
दो चरणों में होगी तबादला सूची जारी
सूत्रों के अनुसार, यह प्रशासनिक फेरबदल कई चरणों में होगा। पहले चरण में विभिन्न विभागों के सचिव, जिलाधिकारी (DM) और अपर सचिव स्तर के अधिकारियों को बदला जाएगा। दूसरे चरण में एडीएम (ADM) और एसडीएम (SDM) स्तर के अधिकारियों के तबादले होंगे। इसके साथ ही विकास प्राधिकरणों के उपाध्यक्ष और सचिवों को भी बदला जा सकता है।
3 साल का कार्यकाल पूरा करने वाले अधिकारियों की विदाई
आगामी चुनावों को देखते हुए कार्मिक विभाग उन अधिकारियों को चिन्हित कर रहा है जिन्हें फील्ड में एक ही पद पर तीन साल पूरे हो चुके हैं। चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार चुनाव से पहले ऐसे अधिकारियों का हटना तय होता है, इसलिए शासन खुद ही पहले से होमवर्क कर इन अफसरों को हटाने और नए चेहरों को जिम्मेदारी देने की तैयारी में है।

